Questionable Enquiry: राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली आबकारी नीति मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही (Departmental Proceedings) शुरू करने का आदेश दिया।
यह आदेश तब आया जब कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज (आरोपमुक्त) कर दिया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणियां और जांच अधिकारी (IO) पर आरोप
- अदालत ने जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे “पूर्व-नियोजित और कोरियोग्राफ्ड” (Pre-meditated and Choreographed) करार दिया।
- बिना सबूत के बनाया आरोपी नंबर 1: कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि आबकारी विभाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर कुलदीप सिंह को बिना किसी सामग्री के ‘आरोपी नंबर 1’ बना दिया गया। जज ने कहा, “मैं दोहरा रहा हूँ, उनके खिलाफ कोई सामग्री नहीं है, फिर भी आपने उन्हें मुख्य आरोपी बनाया।”
- गवाह या संदिग्ध? (दोहरा मापदंड): कोर्ट ने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि IO ने कुछ लोगों को ‘संदिग्धों’ (Suspects) की सूची में भी रखा और साथ ही उन्हें ‘सरकारी गवाह’ (Witness) भी बना दिया।
- उदाहरण: तत्कालीन आबकारी आयुक्त आरवा गोपी कृष्ण को संदिग्ध बताया गया, लेकिन चार्जशीट में वे गवाह नंबर 74 थे।
- अग्रिम हेरफेर (Anticipatory Manipulation): न्यायाधीश ने कहा कि जांच का उद्देश्य सत्य की खोज करना नहीं, बल्कि पहले से तय एक नैरेटिव (कहानी) में लोगों को फिट करना था। यह रणनीति सच्चाई तक पहुंचने के बजाय खुद जांच अधिकारी को बचाने के लिए रची गई थी।
“जांच एक स्पष्ट और सुसंगत मूल्यांकन पर आधारित होनी चाहिए, न कि ऐसी सोची-समझी अस्पष्टता पर जिसका उद्देश्य भविष्य में मनमाने कानूनी विकल्प सुरक्षित रखना हो।”
विशेष न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह
अदालत का उद्देश्य: जवाबदेही तय करना
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई अधिकारी के खिलाफ यह जांच इसलिए जरूरी है ताकि संस्थान की विश्वसनीयता बनी रहे। जांच मशीनरी की जवाबदेही तय हो सके। किसी भी व्यक्ति को बिना किसी आधार के आपराधिक मुकदमे की आग में न झोंका जाए।
मामले से जुड़े प्रमुख नाम और वकील
- CBI की ओर से: एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) डीपी सिंह।
- अरविंद केजरीवाल की ओर से: सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन।
- मनीष सिसोदिया और विनोद चौहान की ओर से: सीनियर एडवोकेट रेबेका जॉन।
- के. कविता की ओर से: पी. मोहित राव।
- विजय नायर की ओर से: सीनियर एडवोकेट माधव खुराना।
दिल्ली आबकारी नीति मामला: घटनाक्रम (2021-2026)
समय घटना
नवंबर, 2021 दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति (Excise Policy) लागू की।
जुलाई, 2022 उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने नीति में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की सिफारिश की।
अगस्त, 2022 CBI और ED ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के अलग-अलग मामले दर्ज किए।
सितंबर, 2022 विवादों के बीच दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति को रद्द कर दिया।
अक्टूबर 2023 – मार्च 2024 ED ने केजरीवाल को पूछताछ के लिए कुल 9 समन जारी किए।
21 मार्च, 2024 हाई कोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक न मिलने के बाद ED ने केजरीवाल को गिरफ्तार किया।
10 मई, 2024 सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी।
20 जून, 2024 ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) ने केजरीवाल को नियमित जमानत दी।
25 जून, 2024 हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जमानत आदेश पर रोक (Stay) लगा दी।
26 जून, 2024 जेल में रहते हुए CBI ने केजरीवाल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया।
12 जुलाई, 2024 सुप्रीम कोर्ट ने ED मामले में अंतरिम जमानत दी, लेकिन CBI मामले के कारण वे जेल में ही रहे।
13 सितंबर, 2024 सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत दी, कहा कि “लंबे समय तक कैद रखना स्वतंत्रता का अन्यायपूर्ण हनन है।
12 फरवरी, 2026 दिल्ली की अदालत ने आरोपों (Charge) पर अपना आदेश सुरक्षित रखा।
27 फरवरी, 2026 अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को मामले में डिस्चार्ज (आरोपमुक्त) कर दिया।

