Rejecting the undertaking: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए साफ कहा है कि आरोपी के किए की सज़ा उसके परिवारवालों को नहीं दी जा सकती।
आरोपी के पास से 731.075 किलो गांजा बरामद हुआ था
जस्टिस मनमोहन और जस्टिस एन.वी. अंजरिया की बेंच ने यह टिप्पणी उस मामले में की जिसमें आरोपी के पास से 731.075 किलो गांजा बरामद हुआ था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹2.91 करोड़ आंकी गई है। यह टिप्पणी उस समय की गई जब एक आरोपी के भाई, जो भारतीय सेना में सिपाही है, की ओर से दिया गया अंडरटेकिंग कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया।
सवाल: आरोपी फरार हो जाए तो क्या भाई को जेल भेज सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट में आरोपी की ओर से यह दलील दी गई कि उसका भाई सेना में है और वह यह अंडरटेकिंग दे सकता है कि आरोपी फरार नहीं होगा। इस दलील को कोर्ट ने साफ खारिज करते हुए कहा, “अगर आरोपी फरार हो जाए, तो उसके भाई को जेल नहीं भेजा जा सकता। भारत में किसी आरोपी के कथित पाप उसके भाई या परिवार पर नहीं थोपे जा सकते।” सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का वह आदेश भी रद्द कर दिया जिसमें आरोपी को जमानत दी गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह जांच ही नहीं की कि NDPS Act की धारा 37 में तय कठोर शर्तें पूरी होती हैं या नहीं।
संगठित तस्करी के संकेत
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपों से यह पूरी तरह साफ है कि मामला संगठित ड्रग तस्करी का है। ट्रेलर के नीचे छिपे हुए विशेष खांचे (concealed cavities) बनाए गए थे, जिनमें नशा लाया-ले जाया जाता था। ऐसे गंभीर आरोपों में 1 साल 4 महीने की हिरासत को लंबा नहीं माना जा सकता, क्योंकि NDPS Act के तहत इन अपराधों में कम से कम 10 साल की सज़ा का प्रावधान है।
भारत में युवाओं में नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता
अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय युवाओं में बढ़ती ड्रग की लत पर भी गहरी चिंता जताई और कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को बेहद सतर्क रहना होगा ताकि नशे के नेटवर्क जड़ से खत्म किए जा सकें।

