Relation Breakup: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, यदि दो वयस्कों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध बनते हैं, तो रिश्ता टूटने के बाद सहमति को वापस लेकर इसे आपराधिक मामला’ नहीं बनाया जा सकता।
महिला वकील की याचिका खारिज
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कानून का मकसद असली पीड़ितों की रक्षा करना है, न कि निजी हताशा या बदला लेने का जरिया बनना।
कोर्ट ने एक महिला वकील की याचिका खारिज करते हुए कहा, आपराधिक कानून को ऐसे रिश्तों से होने वाले बदले या दबाव का जरिया बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती जो पूरी तरह टूट चुके हों। जज ने सख्त लहजे में कहा कि कानून का इस्तेमाल किसी ऐसे रिश्ते के इतिहास को फिर से लिखने के लिए नहीं किया जा सकता, जो अपनी मर्जी से बना हो और वर्षों तक चला हो।
2022 में दर्ज कराया गया था केस
एक महिला वकील ने 2022 में अपने पुरुष साथी और उसके रिश्तेदारों पर दुष्कर्म और धोखे से शादी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। महिला का दावा था कि आरोपी ने अपना धर्म और शादीशुदा होने की जानकारी छिपाई। दोनों 11 साल तक साथ रहे, साथ प्रैक्टिस की और कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कोर्ट ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि महिला को पुरुष की धार्मिक पहचान या वैवाहिक स्थिति का पता नहीं था। जब दो वयस्क अपनी मर्जी से किसी रिश्ते में आते हैं, तो उन्हें उसके परिणामों की जिम्मेदारी लेनी होगी।

