Relief for Doctors: राजस्थान हाई कोर्ट (जोधपुर बेंच) ने पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टरों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को दोहराया है: “खेल के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते” (Rules of the game cannot be changed midway)।
तीन युवा डॉक्टरों ने दायर की थी याचिका
हाईकोर्ट के जस्टिस नूपुर भाटी ने तीन युवा डॉक्टरों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार का 28 जनवरी 2026 का सर्कुलर उन उम्मीदवारों पर लागू नहीं हो सकता जिन्होंने प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी।कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें सुपर-स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों (NEET-SS) के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद अचानक ‘बैंक गारंटी’ की शर्त थोप दी गई थी।
विवाद क्या था? (The ‘Bank Guarantee’ Order)
- सरकारी आदेश: राजस्थान सरकार ने 28 जनवरी, 2026 को एक आदेश जारी किया। इसमें NEET-SS, INI-SS और फेलोशिप करने वाले डॉक्टरों के लिए ‘सर्विस बॉन्ड’ की राशि के बराबर बैंक गारंटी जमा करना अनिवार्य कर दिया गया।
- डॉक्टरों की दलील: याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि जब उन्होंने परीक्षा दी और परिणाम आया, तब ऐसी कोई शर्त नहीं थी। 1 अप्रैल 2025 की पुरानी नीति के तहत केवल एक ‘अंडरटेकिंग’ (वचन पत्र) देना पर्याप्त था।
- अचानक बदलाव: सरकार ने यह शर्त तब लागू की जब काउंसलिंग शुरू होने वाली थी, जिससे डॉक्टरों पर अचानक भारी वित्तीय बोझ आ पड़ा।
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां: “कानूनी रूप से अस्थिर”
- हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के कदम की कड़ी आलोचना की।
- पिछली तारीख से लागू नहीं (No Retrospective Effect): कोर्ट ने कहा कि कोई भी नया सर्कुलर पिछली तारीख से उन प्रक्रियाओं पर लागू नहीं किया जा सकता जो पहले ही महत्वपूर्ण पड़ाव (जैसे परीक्षा और परिणाम) पार कर चुकी हैं।
- उचित अपेक्षा का सिद्धांत (Legitimate Expectation): उम्मीदवार इस उम्मीद के साथ प्रक्रिया में शामिल हुए थे कि नियम पुराने ही रहेंगे। बीच में नए वित्तीय नियम जोड़ना भेदभावपूर्ण और मनमाना है।
- मिसाल: कोर्ट ने डॉ. इशांत कुमार साहू और डॉ. यश वर्धन के पिछले फैसलों का हवाला दिया, जिनमें पहले ही इस तरह की बैंक गारंटी को अवैध ठहराया गया था।
डॉक्टरों को क्या राहत मिली?
- अदालत ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में कई निर्देश दिए।
- पुरानी नीति लागू: याचिकाकर्ता 1 अप्रैल, 2025 की पुरानी नीति के तहत शासित होंगे, यानी उन्हें बैंक गारंटी देने की जरूरत नहीं है।
- दस्तावेजों का ट्रांसफर: राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि वे डॉक्टरों के मूल दस्तावेज (Original Documents) रिलीज और ट्रांसफर करें ताकि उनके एडमिशन में कोई बाधा न आए।
- सर्विस बॉन्ड बरकरार: डॉक्टरों ने कोर्ट में सहमति दी कि वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद राज्य की सेवा करने की बॉन्ड शर्तों (Undertaking) का पालन करेंगे।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
- यह निर्णय हजारों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए एक सुरक्षा कवच है।
- वित्तीय सुरक्षा: यह डॉक्टरों को उन अप्रत्याशित वित्तीय बोझों से बचाता है जो चयन प्रक्रिया के बीच में थोप दिए जाते हैं।
- प्रशासनिक जवाबदेही: यह संदेश देता है कि सार्वजनिक प्रक्रियाओं में निष्पक्षता अनिवार्य है और सरकार अपनी मर्जी से बीच रास्ते में शर्तें नहीं बदल सकती।
निष्कर्ष: पारदर्शिता की जीत
राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ एक मजबूत मिसाल है। यह सुनिश्चित करता है कि डॉक्टरों का करियर और उनकी उच्च शिक्षा केवल नियमों के अचानक बदलाव के कारण प्रभावित न हो।

