Monday, February 16, 2026
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Rent case: मकान मालिक-किरायेदारों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट से रोक लगे मामलों का जल्द करें निपटारा…यह रही सुप्रीम टिप्पणी

Rent case: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से आग्रह किया कि वह मकान मालिक-किरायेदार के बीच मुकदमे पर रोक लगनेवाली कार्यवाही का जल्द निपटारा करें।

किरायेदार के खिलाफ बेदखली कार्यवाही रुक गई

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने रजत गेरा बनाम तरुण रावत के केस की सुनवाई की। मकान मालिक ने यह बताया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थगन (स्टे) के चलते किरायेदार के खिलाफ बेदखली कार्यवाही रुक गई है। इस कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में कोई प्रगति नहीं हो रही है। याचिकाकर्ता ने मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की थी। कोर्ट ने यह ध्यान में रखते हुए कि मुकदमे की कार्यवाही पर रोक से मामले के निपटारे में देरी होगी, हाईकोर्ट को सामान्य दिशा-निर्देश जारी करते हुए ऐसे मामलों को प्राथमिकता से निपटाने को कहा है।

यह रही सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

25 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस तथ्य से अवगत हैं कि हाईकोर्ट के समक्ष सैकड़ों याचिकाएं लंबित हो सकती हैं। फिर भी यह टिप्पणी करने के लिए विवश होना पड़ रहा है कि जिन मामलों में हाईकोर्ट ने विशेष रूप से मकान मालिक और किरायेदार के बीच लंबित मामलों में मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगाई है। ऐसे मामलों की सुनवाई जल्द करें। ऐसा इसलिए क्योंकि मुकदमे या मूल कार्यवाही पर रोक अनिवार्य रूप से मुकदमे के निष्कर्ष और आगे की कार्यवाही में देरी का कारण बनती है। अदालत ने कहा, इन परिस्थितियों में यह कहने के लिए विवश हैं कि हाईकोर्ट उपरोक्त टिप्पणियों का संज्ञान ले और उन मामलों का निपटारा कानून के अनुसार करे। कोर्ट ने आदेश दिया कि इस आदेश की एक प्रति इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

यह है याचिकाकर्ता की मांग

याचिकाकर्ता के वकील ने अनुरोध किया कि स्वीकृत किराये के भुगतान न होने से किरायेदार के बचाव पक्ष को खारिज किया जाए। ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इसके खिलाफ किरायेदार ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की और ट्रायल कोर्ट में चल रही पूरी कार्यवाही पर रोक लगा दी गई। इस कारण याचिकाकर्ता कठिनाई में है क्योंकि किरायेदार की उपस्थिति न होने से मामला लंबा खिंचता जा रहा है और उसे अपने मकान का खाली कब्जा पाने में बाधा आ रही है।

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