BCD Election: दिल्ली हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के चुनाव परिणामों पर रोक लगाने या चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस अमित बंसल ने 9 उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि अंतिम परिणाम घोषित करने से पहले वोटों का मिलान (Reconciliation) करना अनिवार्य होगा।
विवाद क्या था? (The Surplus Vote Mystery)
- वोटों में अंतर: उम्मीदवारों (अनुष्का अरोड़ा, शाहिद अली और अन्य) ने आरोप लगाया कि पहले दिन (21 फरवरी) की गिनती में 17,799 वोट दर्ज किए गए, जबकि वास्तविक मतदान 17,585 हुआ था। यानी 214 वोट अतिरिक्त (Surplus) पाए गए।
- मांग: याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि गिनती के दौरान ही तुरंत वोटों का मिलान (Reconciliation) किया जाए।
- रिटर्निंग ऑफिसर का रुख: RO (जो हाई कोर्ट के पूर्व जज हैं) ने 20 मार्च को कहा था कि मिलान प्रक्रिया समय लेने वाली है, इसलिए इसे गिनती पूरी होने के बाद ही किया जाएगा।
कोर्ट का फैसला: “पहले मिलान, फिर परिणाम”
- हाई कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए निर्देश दिए।
- कोई हस्तक्षेप नहीं: कोर्ट ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि मिलान प्रक्रिया होगी, इसलिए वर्तमान में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
- अनिवार्य शर्त: “चुनाव के परिणाम तभी घोषित किए जाएंगे जब वोटों के मिलान की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।”
- प्रतिनिधित्व का मौका: याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि राउंड-1 की गिनती के बाद ही मिलान होना चाहिए क्योंकि कुछ उम्मीदवार बाहर (Eliminate) हो जाएंगे। इस पर कोर्ट ने उन्हें रिटर्निंग ऑफिसर के सामने अपनी बात (Representation) रखने की छूट दी है।
कानूनी पक्ष और आपत्तियां
- मेंटेनेबिलिटी (Maintainability): बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के वकील टी. सिंह देव ने याचिका की वैधानिकता (Maintainability) पर सवाल उठाए थे।
- कोर्ट का स्टैंड: चूंकि मुख्य समस्या (वोटों का मिलान) का समाधान हो गया है, इसलिए कोर्ट ने मेंटेनेबिलिटी के कानूनी पहलू पर गहराई से जाने की जरूरत नहीं समझी और इसे खुला (Open) रखा।
चुनाव का वर्तमान स्टेटस
- मतदान: फरवरी 2026 में हुआ था।
- गिनती: 02 अप्रैल 2026 में जारी है।
- विवादित आंकड़े: 214 सरप्लस वोटों की व्याख्या होना अभी बाकी है।
निष्कर्ष: पारदर्शिता पर जोर
दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश सुनिश्चित करता है कि बार काउंसिल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के चुनावों में पारदर्शिता (Transparency) बनी रहे। वोटों के मिलान की शर्त ने उम्मीदवारों की मुख्य चिंता को दूर कर दिया है, जिससे अब मतगणना शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो सकेगी।

