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UP HC: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रस्तावित चाइल्ड केयर (क्रेच) सुविधा ideally (आदर्श रूप से) हाईकोर्ट के मुख्य भवन में स्थित होनी चाहिए।
क्रेच सुविधा की स्थापना की मांग की
अधिवक्ता जाह्नवी सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) में इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में क्रेच सुविधा की स्थापना की मांग की गई थी। इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट प्रशासन और रजिस्ट्रार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे 25 जुलाई तक इस मुद्दे पर ठोस और अंतिम जवाब दाखिल करें। इसी दिन मामले की अगली सुनवाई होगी। हालांकि, हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से यह सुझाव दिया गया कि क्रेच को नव-निर्मित प्रस्तावित मेडिएशन बिल्डिंग में शुरू किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता का दावा
जाह्नवी सिंह ने स्वयं पेश होकर दलील दी कि दिल्ली हाईकोर्ट और देश के अन्य उच्च न्यायालयों में अत्याधुनिक और आरामदायक क्रेच सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी उसी स्तर की सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट परिसर में क्रेच की अनुपलब्धता, महिला अधिवक्ताओं और महिला कर्मचारियों के बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है। “पितृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 11A के तहत ऐसे सभी संस्थानों को जहां 50 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हों, एक निश्चित दूरी के भीतर क्रेच सुविधा देना अनिवार्य है और महिलाओं को नियत अंतराल पर वहां जाने की अनुमति होनी चाहिए।”
यह कहा कोर्ट ने
कोर्ट ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से देखा जाए तो क्रेच सुविधा हाईकोर्ट के मुख्य भवन के भीतर होनी चाहिए, ताकि इसका उपयोग सहज रूप से संभव हो सके। हालांकि, प्रशासन ने सुझाव दिया कि इसे नए मेडिएशन भवन में शुरू किया जाए, जिस पर कोर्ट ने अंतिम जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला हाईकोर्ट में काम कर रहीं महिला अधिवक्ताओं और कर्मचारियों की कार्यस्थलीय सुविधा और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। अदालत के रुख से संकेत मिलता है कि न्यायपालिका समान और समावेशी कार्य वातावरण की दिशा में गंभीर है।







