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Wrongful arrest: पत्नी की हत्या के झूठे आरोप में 18 महीने की जेल…अब मांगा 5 करोड़ मुआवजा

Wrongful arrest: कर्नाटक के कुशलनगर तालुका के बसवनहल्ली गांव के रहने वाले आदिवासी युवक कुरुबारा सुरेश ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 5 करोड़ रुपए मुआवजा और झूठे केस में फंसाने वाले पुलिस अफसरों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।

वर्ष 2022 में महिला की हत्या का आरोप, अप्रैल 2025 में जिंदा मिली

सुरेश पर 2022 में अपनी पत्नी मल्लिगे की हत्या का आरोप लगा था और वह करीब 18 महीने जेल में रहा। लेकिन अप्रैल 2025 में मल्लिगे जिंदा मिल गई। इसके बाद मैसूरु की 5वीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुरेश को पूरी तरह बरी कर दिया और राज्य गृह विभाग को 1 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। हालांकि, सुरेश इस मामूली मुआवजे और सीमित कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है।

5 पुलिस अफसरों पर लगाए गंभीर आरोप

सुरेश ने अपनी याचिका में तत्कालीन जांच अधिकारी इंस्पेक्टर प्रकाश बीजी, तत्कालीन एएसपी जितेंद्र कुमार, सब-इंस्पेक्टर प्रकाश यत्तिमणि और महेश बीके, तथा एएसआई सोमशेखर को नामजद किया है। सुरेश का आरोप है कि इन अफसरों ने सबूतों से छेड़छाड़ की, अपने पद का दुरुपयोग किया और बिना उचित प्रक्रिया के उसे गिरफ्तार किया। सुरेश ने इन सभी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और हर्जाने की मांग की है।

2021 में पत्नी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी

यह मामला 2021 का है, जब सुरेश ने अपनी पत्नी मल्लिगे के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। 2022 में मैसूरु जिले के बेट्टदपुरा थाना क्षेत्र में कुछ कंकाल बरामद हुए। पुलिस ने बिना डीएनए जांच के यह मान लिया कि ये मल्लिगे के अवशेष हैं। आरोप है कि पुलिस ने सुरेश और उसकी सास पर दबाव डालकर इन अवशेषों की पहचान मल्लिगे के रूप में करवाई।

डीएनए रिपोर्ट से खुला झूठ, फिर भी जेल में रहा

बाद में कोर्ट के आदेश पर हुई डीएनए जांच में साफ हो गया कि ये अवशेष मल्लिगे के नहीं थे। इसके बावजूद सुरेश को 18 महीने तक जेल में रखा गया। बाद में उसे जमानत मिली और वह रिहा हुआ।

रेस्टोरेंट में दिखी मल्लिगे, फिर सामने आया सच

अप्रैल 2025 में सुरेश के दोस्तों ने मल्लिगे को मडिकेरी के एक रेस्टोरेंट में देखा। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मैसूरु कोर्ट में पेश किया। मल्लिगे के जिंदा मिलने से पुलिस जांच की गंभीर खामियां उजागर हुईं। सवाल उठे कि क्या यह लापरवाही थी या जानबूझकर की गई साजिश।

सिर्फ एक अफसर पर कार्रवाई की सिफारिश से नाराज

सत्र न्यायालय ने सिर्फ इंस्पेक्टर प्रकाश बीजी के खिलाफ सबूतों से छेड़छाड़ के लिए कार्रवाई की सिफारिश की थी। लेकिन सुरेश चाहता है कि सभी पांचों अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जाए। उसने हाईकोर्ट से यह भी मांग की है कि उसे “आरोपी” नहीं बल्कि “पीड़ित” घोषित किया जाए।

तीन साल तक कहां थी मल्लिगे, जांच जारी

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मल्लिगे पिछले तीन सालों तक कहां थी और वह क्यों और कैसे गायब हुई थी। इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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