सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल: अन्य दवाओं पर मार्जिन कैप क्यों नहीं?
पीठ ने कैंसर दवाओं तक सीमा तय करने के कदम का संज्ञान तो लिया, लेकिन पूछा कि पूरे फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में यह नियम लागू क्यों नहीं किया जा रहा। अदालत ने कई उदाहरण पेश किए:
- कार्डियक स्टेंट (Heart Stent): स्वदेशी स्टेंट की खुदरा विक्रेता कीमत (PTR) ₹5,000 होती है, लेकिन उसकी MRP ₹25,000 छापी जाती है। यदि इस पर 16% का मार्जिन कैप लगाया जाए, तो अनुचित मेडिकल हस्तक्षेप (Interventions) में भारी कमी आएगी।
- एज़िथ्रोमाइसिन (Azithromycin): स्टॉकियास्ट कीमत (PTS) ₹28.50 है, जबकि MRP ₹78.29 छापी जा रही है।
- सेलाइन ड्रिप लाइन (Saline Drip): ड्रिप लाइन की वास्तविक MRP ₹11 होनी चाहिए, लेकिन इसे ₹270 तक में बेचा जा रहा है।
“निर्माता किस आधार पर कीमतें तय करता है कि दवा या उपकरण अपनी लागत से 5 गुना या 10 गुना अधिक कीमत पर बेचा जाता है? मरीजों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए कोई एक तर्कसंगत औचित्य बताएं।”
— न्यायमूर्ति विक्रम नाथ व न्यायमूर्ति संदीप मेहता
केंद्र सरकार और फार्मा उद्योग की दलीलें
- अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी की दलील:सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि दवा मूल्य नीति में उपलब्धता और बाजार शक्तियों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप से दवाओं की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- DPCO 2013 का दायरा: याचिकाकर्ता किशन चंद जैन ने स्पष्ट किया था कि ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत केवल ~1,000 “अनुसूचित” (Scheduled) दवाओं की कीमतों पर ceiling होती है, जबकि बाजार की 82% गैर-अनुसूचित दवाएं खुले मार्जिन के भरोसे छोड़ दी जाती हैं।
- इण्डियन फार्मास्युटिकल अलायंस (Kapil Sibal): वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि अधिकांश फॉर्मूलेशन में इतना बड़ा मार्जिन अंतर नहीं होता है।
नई दिल्ली: आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के अत्यधिक मूल्य निर्धारण (Exorbitant Drug Pricing), औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 (Drug Price Control Order – DPCO, 2013) के तहत गैर-अनुसूचित दवाओं (Non-Scheduled Drugs) पर अनियंत्रित मुनाफाखोरी, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा ट्रेड मार्जिन युक्तिकरण (Trade Margin Rationalisation – TMR), तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य के अधिकार और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर भारत के सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल उठाए हैं।
शीर्ष अदालत की पूर्व में की गई तीखी फटकार के बाद, केंद्र सरकार ने सोमवार (12 अक्टूबर 2026) को अदालत को सूचित किया कि उसने कैंसर-रोधी दवाओं (Anti-Cancer Drugs) के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर व्यापार मार्जिन (Trade Margin) को 30 प्रतिशत तक सीमित (Cap) कर दिया है। हालांकि, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने केंद्र के इस कदम को अपर्याप्त मानते हुए सवाल किया कि मार्जिन पर यह सीमा केवल कैंसर दवाओं तक ही सीमित क्यों रखी गई है, जबकि स्टेंट, सेलाइन ड्रिप लाइन और एजिथ्रोमाइसिन जैसी रोजमर्रा की सामान्य दवाओं और मेडिकल उपभोग्य सामग्रियों पर कंपनियाँ और वितरक भारी-भरकम मुनाफा वसूल रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायिक निष्कर्ष एवं मौखिक टिप्पणियां
1. ‘₹11 की ड्रिप ₹270 में और भारी मार्जिन के चलते अनावश्यक सर्जरी’
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अस्पतालों और फार्मा कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले अनुचित लाभ मार्जिन पर कड़े आंकड़े सामने रखे: “यह आदेश केवल कैंसर दवाओं से संबंधित है। समग्र दवा क्षेत्र का क्या? एक सामान्य भारतीय निर्मित कार्डियक स्टेंट के लिए रिटेलर का मूल्य (PTR) ₹5,000 है, लेकिन उसकी MRP ₹25,000 रखी जाती है। यदि आप 16 प्रतिशत का कैप लगा दें, तो चिकित्सीय हस्तक्षेपों (Medical Interventions/Surgeries) में तीन-चौथाई तक की कमी आ जाएगी। डॉक्टर केवल इसलिए ऐसे चिकित्सीय हस्तक्षेप करवाते हैं क्योंकि इनमें मार्जिन अत्यधिक ऊंचा (Margins are so high) होता है।”
2. ‘मरीज के हित का एक भी कारण बताइए; दिनदहाड़े डकैती बंद हो’:
अदालत ने एंटीबायोटिक दवाओं और उपभोग्य सामग्रियों के मूल्य अंतर पर विधि अधिकारियों से पूछा:
- पीठ ने उदाहरण देते हुए कहा:“एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin) की MRP ₹78.29 है, जबकि स्टॉकिस्ट का मूल्य (PTS) मात्र ₹28.50 है। हमें मरीज के लिए इसका एक भी लाभकारी कारण बताइए… सलाइन के लिए एक ड्रिप लाइन की वास्तविक लागत/MRP ₹11 है और इसे ₹270 में बेचा जा रहा है… निर्माता कैसे कीमत तय करता है कि अंततः उत्पाद 5 गुना या 10 गुना अधिक कीमत पर बेचा जाता है?”
- पीठ ने याद दिलाया कि कुछ ही सप्ताह पूर्व अदालत ने ₹2,700 की कैंसर दवाओं को ₹27,000 की एमआरपी पर बेचे जाने को “दिनदहाड़े डकैती” (Broad daylight dacoity) और सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के साथ खुला धोखा करार दिया था।
3. बाजार शक्तियों के तर्क को अदालत ने नकारा:
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप से दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और बाजार असंतुलित हो सकता है। अदालत ने इस पर असहमति जताते हुए कहा: “हमें एक ऐसा औचित्य दीजिए जहां मरीजों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई गई हो। आप DPCO के तहत 16 प्रतिशत का मार्जिन देते हैं। क्या DPCO द्वारा नियंत्रित दवाएं उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचतीं?“
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं याचिकाकर्ता की मांगें
| विवरण | तथ्य एवं विधिक पहलू |
| मूल याचिकाकर्ता | किशन चंद जैन (जनहित याचिका)। |
| मुख्य प्रार्थनाएं | 1. डॉक्टरों द्वारा अनिवार्य जेनेरिक दवाएं लिखने (Mandatory Generic Prescriptions) का निर्देश। 2. गैर-अनुसूचित (Non-Scheduled) दवाओं के प्रारंभिक मूल्य निर्धारण पर सख्त नियंत्रण। 3. सभी चिकित्सा उपकरणों (Medical Devices) की MRP पर अधिकतम सीमा तय करना। |
| DPCO 2013 की खामी | याचिकाकर्ता ने रेखांकित किया कि NPPA वर्तमान में केवल लगभग 1,000 ‘अनुसूचित दवाओं’ की अधिकतम कीमत (Ceiling Price) तय करता है। बाजार में उपलब्ध लगभग 82% दवाएं गैर-अनुसूचित श्रेणी में हैं, जिन पर निर्माता और वितरक मनमाना मार्जिन जोड़ते हैं। |
| केंद्र सरकार का ताजा कदम | केंद्र ने कैंसर दवाओं के व्यापार मार्जिन को 30% पर कैप करने का फैसला किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार समय-समय पर कैंसर दवाओं की अद्यतन सूची जारी करेगी, जिसमें केवल सस्ती दवाओं को बाहर रखा जाएगा। |
| फार्मा उद्योग का रुख | इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अधिकांश फॉर्मूलेशन में इतना अधिक मार्क-अप (Mark-up) मौजूद नहीं होता। |
विधिक एवं नीतिगत विश्लेषण: ट्रेड मार्जिन कैपिटलाइजेशन (TMR) क्या है?
- ट्रेड मार्जिन का गणित:
- ट्रेड मार्जिन वह अंतर है जो निर्माता द्वारा वितरक/स्टॉकिस्ट को बेची गई कीमत (Price to Stockist – PTS) और अंतिम उपभोक्ता द्वारा चुकाई गई अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच होता है।
- वर्तमान में गैर-अनुसूचित दवाओं के मामले में कंपनियां मनमाने ढंग से भारी एमआरपी प्रिंट करती हैं, जिससे अस्पतालों और रिटेलरों को 100% से लेकर 1000% तक का अनुचित मुनाफा कमाने की छूट मिल जाती है।
- संविधान का अनुच्छेद 21 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955:
- सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व नजीरों में स्थापित किया है कि जीवन रक्षक दवाओं तक वहनीय पहुंच (Affordable Access) अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग है।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी ड्रग्स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO) सरकार को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी आवश्यक दवा के मूल्य को विनियमित करे ताकि आम नागरिकों का आर्थिक शोषण न हो।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: किशन चंद जैन बनाम एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (EMRB) व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – सर्वोच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता (खंडपीठ)
- सुनवाई की तिथि: 12 अक्टूबर 2026
- अगली सुनवाई की तिथि: 27 अक्टूबर 2026
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता की ओर से: किशन चंद जैन (स्वयं/वकील)
- केंद्र सरकार (भारत संघ) की ओर से: सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता एवं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी
- इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार)
- औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 (DPCO, 2013)
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3
- राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के विनियमन
- अंतिम परिणाम: कैंसर दवाओं पर 30% मार्जिन कैप को केंद्र ने सूचित किया; अदालत ने इसे सभी दवाओं और उपभोग्य सामग्रियों पर लागू न करने पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा; विस्तृत सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को तय।
Cancer Medicine: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता |
| मामला | Kishan Chand Jain v. Ethics and Medical Registration Board (EMRB) & Ors. |
| मुख्य याचिका | गैर-अनुसूचित दवाओं के प्रारंभिक मूल्य नियंत्रण, जेनेरिक दवाओं की अनिवार्यता और मेडिकल डिवाइसेस के MRP कैपिंग की मांग |
| केंद्र सरकार का कदम | कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को MRP के 30% पर कैप किया। |
| सुप्रीम कोर्ट का रुख | असंतोष व्यक्त किया; पूछा कि अन्य रोजमर्रा की दवाओं और उपकरणों पर 10 गुना तक के मार्जिन पर रोक क्यों नहीं? |
| अगली सुनवाई | 27 अक्टूबर 2026 |

