Friday, October 16, 2026
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Air Act: सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध साल भर सभी त्योहारों पर लागू; बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 सितंबर के आदेश का दायरा पूरे साल के लिए बढ़ाया

अदालत की मुख्य व कड़ी टिप्पणियां

  1. “अधिकारियों का कोई नियंत्रण नहीं, अराजकता की स्थिति”:पीठ ने पटाखों पर नियंत्रण न रख पाने के लिए प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा:“पटाखे जलाने पर अधिकारियों का कोई नियंत्रण नहीं है। हम सभी संविधान से बंधे हैं और नागरिकों (विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों) के स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है। असली समस्या कानून का पालन न होना है।”
  2. बच्चों और बुजुर्गों पर जहरीले धुएं का असर:जजों ने रेखांकित किया कि दीवाली और अन्य त्योहारों के बाद जो जहरीला धुंध (Toxic Smog/Haze) और प्रदूषण फैलता है, उसका सबसे भयानक प्रभाव बच्चों, रोगियों और बुजुर्ग नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
  3. स्पष्टीकरण — निर्माण और बिक्री पर रोक नहीं:पीठ ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि अदालत ने पटाखों के निर्माण (Manufacturing) या बिक्री (Sale) पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। केवल सार्वजनिक सड़कों और आम रास्तों को आतिशबाजी के लिए इस्तेमाल करने पर रोक लगाई गई है।

हाईकोर्ट द्वारा प्रशासन (BMC, MPCB व पुलिस) को जारी कड़े निर्देश

हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और MPCB को निम्नलिखित ठोस कदम उठाने के आदेश दिए हैं:

  1. सार्वजनिक सूचनाएं: जहरीले धुएं और वायु-ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति नागरिकों को सचेत करने के लिए संयुक्त सार्वजनिक नोटिस जारी करें।
  2. जागरूकता अभियान: स्कूलों, सार्वजनिक परिवहन (बसों, लोकल ट्रेनों) और मीडिया में 1 सप्ताह के भीतर जागरूकता अभियान चलाएं।
  3. सेलिब्रिटीज का सहयोग: पर्यावरण सुरक्षा और हरित पटाखों (Green Crackers) को बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध हस्तियों (Celebrities) को अभियान में शामिल करें।
  4. पुलिस शिकायत तंत्र: सड़कों पर अवैध रूप से पटाखे फोड़ने और लाउडस्पीकर/प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ नागरिकों की शिकायत दर्ज करने हेतु पुलिस के साथ एक कुशल तंत्र (Complaint Mechanism) स्थापित करें।

मुंबई: वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (Air Act, 1981), ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 (Noise Pollution Rules, 2000), संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ वायु व प्रदूषण-मुक्त वातावरण में जीने का मौलिक अधिकार, सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर अनियंत्रित आतिशबाजी व उच्च-डेसिबल साउंड सिस्टम (डीजे) से उत्पन्न स्वास्थ्य जोखिम, तथा उत्सवों के दौरान प्रशासनिक निष्क्रियता (Enforcement Failure) पर बॉम्बे उच्च न्यायालय ने व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं।

न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला के. गोखले की खंडपीठ ने गुरुवार (15 अक्टूबर 2026) को स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (Suo Motu PIL) तथा संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए अपने 22 सितंबर 2026 के अंतरिम आदेश को पूरे वर्ष के लिए प्रभावी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर लगा प्रतिबंध केवल गणेशोत्सव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह चल रही नवरात्रि, आगामी दिवाली, क्रिसमस, नए साल सहित वर्ष भर मनाए जाने वाले सभी त्योहारों और सार्वजनिक जुलूसों पर समान रूप से लागू रहेगा।

उच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायिक निष्कर्ष एवं विधिक टिप्पणियां

1. ‘नागरिकों के अधिकार सर्वोपरि हैं; समस्या कानून का पालन न होना है’

खंडपीठ ने सार्वजनिक सड़कों पर बेकाबू आतिशबाजी को नियंत्रित करने में विफल रहने पर राज्य प्रशासन और पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा: *”पटाखे जलाने पर आपका [प्राधिकारियों का] कोई नियंत्रण नहीं है। हम सभी संविधान से बंधे हैं और नागरिकों के मौलिक अधिकार सर्वोपरि हैं (Rights of citizens are paramount)। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कानून का पालन नहीं किया जा रहा है (The problem is the non-following of law)।”*

2. बच्चों और बुजुर्गों पर दिवाली के जहरीले प्रदूषण का गंभीर प्रभाव:

  • पीठ ने रेखांकित किया कि दिवाली और अन्य बड़े त्योहारों के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक गिर जाता है।
  • यह विषाक्त वायु प्रदूषण (Toxic Pollution) विशेष रूप से नवजात बच्चों, सांस के रोगियों और वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है, जिसके चलते वैधानिक प्रवर्तन (Statutory Enforcement) में कड़े बदलाव अनिवार्य हैं।

3. निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध नहीं:

  • अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश सार्वजनिक मार्गों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगाता है ताकि आम राहगीरों और यातायात को खतरा न हो तथा ध्वनि व वायु प्रदूषण नियंत्रित रहे।
  • अदालत ने पटाखों के विनिर्माण (Manufacture) या वैधानिक रूप से अधिकृत बिक्री (Sale of Firecrackers) पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है।

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राज्य सरकार, BMC और MPCB को 5-सूत्रीय कार्ययोजना के निर्देश

उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) को तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित समन्वित कदम उठाने का आदेश दिया:

 ┌─────────────────────────────────────────────────┐
│ बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जारी 5-सूत्रीय अनुपालन एजेंडा │
└─────────────────────┬────────────────────────────┘
│
┌───────────────────┬────────────────┼───────────────────┬───────────────────┐
▼ ▼ ▼ ▼ ▼
【संयुक्त सार्वजनिक नोटिस】 【जागरूकता अभियान】 【हस्तियों का सहयोग】 【ग्रीन क्रैकर्स】 【त्वरित शिकायत तंत्र】
BMC, MPCB और राज्य स्कूलों, कॉलेजों और नागरिकों को जागरूक कम उत्सर्जन वाले पुलिस के साथ मिलकर
सरकार जहरीले प्रभावों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट में करने के लिए प्रमुख हरित पटाखों (Green एक त्वरित और प्रभावी
संयुक्त नोटिस जारी करें। 1 सप्ताह में अभियान। हस्तियों को जोड़ें। Crackers) को बढ़ावा। शिकायत प्रणाली बनाएं।
  1. संयुक्त सार्वजनिक नोटिस: बीएमसी, एमपीसीबी और राज्य सरकार जहरीले वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए समाचार पत्रों और सार्वजनिक मंचों पर नोटिस जारी करें।
  2. एक सप्ताह के भीतर जागरूकता अभियान: सभी स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक परिवहन (लोकल ट्रेन, मेट्रो, बस स्टैंड) पर विशेष अभियान शुरू किया जाए।
  3. प्रसिद्ध हस्तियों (Celebrities) को जोड़ना: नागरिकों को प्रदूषण-मुक्त उत्सव मनाने हेतु प्रेरित करने के लिए खेल, कला और सिनेमा जगत की प्रसिद्ध हस्तियों का सहयोग लिया जाए।
  4. कम उत्सर्जन वाले ‘ग्रीन क्रैकर्स’ को बढ़ावा: पर्यावरण-अनुकूल और कम धुआं व आवाज करने वाले प्रमाणित ग्रीन पटाखों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
  5. पुलिस नियंत्रण कक्ष के साथ कुशल शिकायत तंत्र: यदि सार्वजनिक सड़कों पर अवैध रूप से पटाखे फोड़े जा रहे हों, तो आम नागरिक तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें और पुलिस तुरंत कार्रवाई करे।

विवाद की पृष्ठभूमि एवं पूर्व आदेश का विस्तार

विवरणघटनाक्रम एवं तथ्य
मामले की प्रकृतिस्वतः संज्ञान जनहित याचिका (High Court on its own motion v. State of Maharashtra & Ors.) एवं संबंधित जनहित याचिकाएं।
मूल आदेश (22 सितंबर 2026)गणेशोत्सव के विसर्जन और जुलूसों के दौरान अत्यधिक ध्वनि (डीजे सिस्टम) और सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर नियंत्रण हेतु प्रारंभिक निर्देश पारित किए गए थे।
15 अक्टूबर 2026 का विस्तारवायु गुणवत्ता की गंभीर स्थिति को देखते हुए पीठ ने इस प्रतिबंध को साल भर के लिए स्थायी और सभी धर्मों/त्योहारों (नवरात्रि, दिवाली, क्रिसमस आदि) पर लागू कर दिया।
प्रतिबंधित क्षेत्रसभी सार्वजनिक सड़कें (Public Streets), गलियां (Lanes), चौराहे और पैदल चलने वाले फुटपाथ (Footpaths)।

विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: क्या कहता है कानून?

  • संविधान का अनुच्छेद 21 और प्रदूषण-मुक्त जीवन:
    • सर्वोच्च न्यायालय ने अर्जुन गोपाल बनाम भारत संघ (2018 – पटाखा विनियमन मामला) में स्पष्ट रूप से माना था कि धार्मिक उत्सव मनाने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के स्वास्थ्य और स्वच्छ वायु में सांस लेने के अधिकार को पराजित नहीं कर सकता।
  • ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000:
    • नियमों के अनुसार सार्वजनिक सड़कों या ‘साइलेंस जोन’ (अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों व अदालतों के 100 मीटर के भीतर) पटाखों या लाउडस्पीकरों का अनियंत्रित उपयोग दंडनीय है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर और तेज आवाज वाले पटाखों पर पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध है।
  • सार्वजनिक उपद्रव (Public Nuisance under BNS/BNSS):
    • व्यस्त सड़कों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ना राहगीरों के लिए सीधा खतरा है और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270/272 (सार्वजनिक स्वास्थ्य व सुरक्षा को खतरा) के तहत संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: उच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य [जनहित याचिका – बॉम्बे उच्च न्यायालय]
  • पीठ: न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला के. गोखले (खंडपीठ)
  • आदेश की तिथि: 15 अक्टूबर 2026
  • संबद्ध पक्षकार:
    • याचिका: स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (सार्वजनिक मार्गों पर आतिशबाजी व ध्वनि प्रदूषण)
    • प्रतिवादी: महाराष्ट्र राज्य सरकार, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और मुंबई पुलिस
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक नियम:
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार), अनुच्छेद 48A एवं अनुच्छेद 226
    • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 एवं वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981
    • ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • त्योहारों में सार्वजनिक स्वास्थ्य की सर्वोच्चता: ‘संविधान के तहत नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार किसी भी उत्सव के दौरान सड़कों पर होने वाले प्रदूषण से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है; सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध वर्ष भर सभी त्योहारों पर समान रूप से प्रभावी रहेगा।’
  • अंतिम परिणाम: सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर आतिशबाजी पर वर्ष भर के लिए पूर्ण प्रतिबंध की पुष्टि; राज्य सरकार, बीएमसी और एमपीसीबी को एक सप्ताह में संयुक्त अभियान शुरू करने और शिकायत तंत्र स्थापित करने का आदेश।

Air Act: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court)
पीठन्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी एवं न्यायमूर्ति नीला के. गोखले
मुख्य आदेशसार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों और गलियों में पटाखे फोड़ने पर साल भर (Year-Round) प्रतिबंध लागू रहेगा।
प्रतिबंध का दायराकेवल सार्वजनिक रास्तों/सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक। पटाखों के निर्माण या बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
प्रभावी क्षेत्रसंपूर्ण महाराष्ट्र राज्य (विशेषकर मुंबई बीएमसी क्षेत्र)।
जिम्मेदार संस्थाएंमहाराष्ट्र सरकार, बीएमसी (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB)।
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