घटनाक्रम और पत्रकार के गंभीर आरोप
- क्या है पूरा विवाद?12 अक्टूबर 2026 को इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री तक मार्च निकाला था।
- पत्रकार रिचा पराशर का दावा:पत्रकार का आरोप है कि जब वह सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के पास कवरेज कर रही थीं, तब राहुल गांधी ने उनका हाथ खींचा और उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का दे दिया। धक्का लगने से वह सीढ़ियों पर गिर गईं और उनका फोन टूट गया। 3 महीने की गर्भवती होने के कारण पेट के बल गिरने से उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- सुप्रीम कोर्ट में दलीलें:वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कोर्ट से इस घटना का संज्ञान लेने और महिला पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। CJI सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक उल्लेख पर स्वतः संज्ञान नहीं लिया जाएगा, बल्कि औपचारिक आवेदन/याचिका दाखिल होने पर इसकी जांच की जाएगी। इसके बाद यह अंतरिम आवेदन दायर किया गया, जिसे 26 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया गया है।
- कांग्रेस पार्टी का इनकार:कांग्रेस पार्टी और उसकी प्रवक्ता अलका लांबा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से “झूठा और भाजपा द्वारा प्रायोजित प्रचार” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि किसी के साथ कोई धक्का-मुक्की नहीं हुई है।
नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय परिसर और रजिस्ट्री क्षेत्र की विधिक सुरक्षा व मर्यादा (Security and Sanctity of Supreme Court Premises), आपराधिक बल प्रयोग एवं महिला लज्जा भंग (Criminal Force and Outraging Modesty under BNS), राजनीतिक मार्च/प्रदर्शनों के दौरान ऑन-ड्यूटी पत्रकारों—विशेष रूप से गर्भवती महिला मीडियाकर्मियों—के साथ कथित दुर्व्यवहार, चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका से जुड़ी अंतरिम अर्जियों (Interlocutory Applications – IAs), तथा संबद्ध मामलों में न्यायिक नोटिस जारी करने की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम प्रक्रियात्मक निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की खंडपीठ ने शुक्रवार (16 अक्टूबर 2026) को वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की विशेष मेंशनिंग पर सुनवाई करते हुए स्वतंत्र पत्रकार ऋचा पाराशर द्वारा दायर अंतरिम अर्जी (IA) को 26 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि 12 अक्टूबर को ‘INDIA’ ब्लॉक के विपक्षी नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के दौरान रजिस्ट्री परिसर में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और उनके सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई की, जिसके चलते वे सीढ़ियों पर पेट के बल गिर गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए सिरे से खारिज किया है।
अदालत में शुक्रवार (16 अक्टूबर 2026) की न्यायिक कार्यवाही
1. वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया द्वारा मेंशनिंग और नोटिस पर स्पष्टीकरण
- वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए अर्जी को शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।
- भाटिया ने पीठ से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया कि गुरुवार को उनके द्वारा उल्लेख किए गए मामले में क्या औपचारिक नोटिस जारी किया गया है।
- सीजेआई सूर्यकांत ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हुए दर्ज किया: “सभी मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं (Notice has been issued in all matters)। इस अंतरिम अर्जी को 26 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।”
2. मौखिक उल्लेख के बजाय औपचारिक अर्जी का निर्देश:
- यह मामला गुरुवार (15 अक्टूबर) को भी पीठ के समक्ष उठाया गया था, जब भाटिया ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया था।
- अदालत ने उस समय स्पष्ट किया था कि इतने गंभीर आरोपों पर मौखिक दलीलों के आधार पर नहीं, बल्कि एक औपचारिक अंतरिम अर्जी (IA) के माध्यम से ही संज्ञान लिया जा सकता है, जिसके बाद पत्रकार की ओर से विधिवत आवेदन दायर किया गया।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं पत्रकार के गंभीर आरोप
| विवरण / पक्ष | तथ्यात्मक स्थिति एवं आरोप |
| घटना की तिथि व स्थल | 12 अक्टूबर 2026, सर्वोच्च न्यायालय परिसर / रजिस्ट्री भवन के समीप सीढ़ियां। |
| मूल संदर्भ (मार्च का उद्देश्य) | लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों द्वारा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च। |
| शिकायतकर्ता की पहचान | ऋचा पाराशर (स्वतंत्र पत्रकार / यूट्यूबर, गर्भावस्था के प्रथम त्रैमासिक / First Trimester में)। |
| धक्का-मुक्की और चोट के आरोप | पत्रकार ने आरोप लगाया कि जब वे कवरेज कर रही थीं, तो राहुल गांधी ने उनका हाथ पकड़ा और खींचा, जिसके तुरंत बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने धक्का दिया। भीड़ के दबाव में वे सीढ़ियों पर पेट के बल गिर पड़ीं और उनका मोबाइल फोन टूट गया। |
| चिकित्सीय आपातकाल का दावा | उन्होंने दावा किया कि असहनीय पेट दर्द के चलते उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां गर्भावस्था की स्थिति को देखते हुए एक्स-रे रोककर आपातकालीन अल्ट्रासाउंड किया गया। |
| कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक रुख | कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के विधिक प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को मनगढ़ंत, राजनीति से प्रेरित और झूठा करार देते हुए पूरी तरह से खारिज किया है। |
विधिक एवं प्रक्रियात्मक विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
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│ सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री परिसर: सुरक्षा व दायित्व │└───────────────────────────┬────────────────────────────┘
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【अदालत परिसर की प्रादेशिक सुरक्षा】 【आपराधिक बल का प्रयोग (BNS धारा 131/74)】 【CCTV साक्ष्य और स्वतंत्र जांच】
• सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री और • महिला के विरुद्ध गैर-सहमति से बल • रजिस्ट्री और गलियारों में लगे उच्च-क्षमता
परिसर 'उच्च सुरक्षा क्षेत्र' हैं; वहां प्रयोग (Criminal Force) या लज्जा भंग CCTV कैमरों के फुटेज मामले की सत्यता
राजनीतिक भीड़ या अनियंत्रित प्रवेश वर्जित। का आरोप संज्ञेय अपराध की श्रेणी में है। जांचने का प्राथमिक विधिक साक्ष्य होंगे।
- सर्वोच्च न्यायालय परिसर सुरक्षा नियम एवं मर्यादा:
- सर्वोच्च न्यायालय परिसर एक संरक्षित और संवेदनशील क्षेत्र है जहां किसी भी राजनीतिक दल द्वारा बड़े पैमाने पर शक्ति प्रदर्शन, नारेबाजी या अनियंत्रित मार्च की अनुमति नहीं होती।
- यदि रजिस्ट्री के भीतर किसी पत्रकार या आगंतुक के साथ शारीरिक हिंसा या धक्का-मुक्की होती है, तो यह केवल सामान्य अपराध नहीं बल्कि न्यायालय की प्रशासनिक शुचिता और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के प्रासंगिक प्रावधान:
- धारा 131 / 132 (आपराधिक बल व हमला): किसी व्यक्ति पर उसकी सहमति के बिना शारीरिक बल का प्रयोग करना या चोट पहुंचाना।
- धारा 74 (महिला की लज्जा भंग करने के आशय से हमला या आपराधिक बल): किसी महिला को अनुचित रूप से खींचना या धक्का देना जिससे उसकी गरिमा या सुरक्षा खतरे में पड़े।
- गर्भावस्था की स्थिति में उपेक्षापूर्ण कृत्य: यदि किसी गर्भवती महिला को जानबूझकर या घोर उपेक्षा से धक्का दिया जाता है जिससे गर्भस्थ शिशु को खतरा उत्पन्न हो, तो यह और अधिक गंभीर विधिक परिणाम आकर्षित करता है।
- डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (BSS धारा 61/63):
- चूंकि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री, गेट और गलियारों में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और दिल्ली पुलिस की कड़ी निगरानी तथा चौबीसों घंटे 360-डिग्री CCTV कैमरे सक्रिय रहते हैं, इसलिए घटना की वस्तुनिष्ठ सत्यता, कॉलर माइक की ऑडियो रिकॉर्डिंग और सुरक्षा कैमरों की फुटेज ही 26 अक्टूबर को न्यायिक परीक्षण का मुख्य आधार बनेंगी।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: ऋचा पाराशर बनाम राहुल गांधी व अन्य [रिट याचिका (सिविल) संख्या 1351/2026 में अंतरिम अर्जी (IA) – सर्वोच्च न्यायालय]
- पीठ: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 16 अक्टूबर 2026
- सुनवाई की अगली तिथि: 26 अक्टूबर 2026
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- अर्जी का उल्लेखकर्ता: वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचार) एवं अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार)
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) — धारा 74 (महिला पर आपराधिक बल), धारा 131 व धारा 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना)
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) — इलेक्ट्रॉनिक व सीसीटीवी साक्ष्यों की ग्राह्यता
- सर्वोच्च न्यायालय नियम, 2013 — अंतरिम अर्जियों (IAs) की ग्राह्यता एवं परिसर सुरक्षा नियमावली
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- न्यायिक परिसर में विधि का शासन और पत्रकारों की सुरक्षा: ‘शीर्ष अदालत की दहलीज पर संवैधानिक उपचार मांगने आने वाले नेताओं को अदालती मर्यादा और परिसर सुरक्षा का उच्चतम मानक बनाए रखना अनिवार्य है; किसी ऑन-ड्यूटी महिला पत्रकार के साथ कथित शारीरिक बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच और सत्यता का परीक्षण विधि के अनुरूप होना आवश्यक है।’
- वर्तमान न्यायिक स्थिति: अंतरिम अर्जी को औपचारिक रूप से स्वीकार करते हुए 26 अक्टूबर 2026 को मुख्य मामले और चुनाव आयोग संबंधी याचिकाओं के साथ सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया गया है; सीजेआई ने पुष्टि की है कि सभी संबद्ध याचिकाओं पर नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
INDIA Bloc: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत एवं न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची |
| याचिकाकर्ता/पीड़ित | रिचा पराशर (पत्रकार, 3 महीने की गर्भवती) |
| आरोपी | लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनके सुरक्षाकर्मी |
| मुख्य आरोप | 12 अक्टूबर के मार्च के दौरान हाथ खींचने, धक्का देने, सीढ़ियों से गिराने और फोन तोड़ने का आरोप। |
| कोर्ट का आदेश | मामले की सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 के लिए तय की गई। CJI ने स्पष्ट किया कि सभी संबद्ध मामलों में नोटिस जारी किया जा चुका है। |

