LLM news: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा, ऑनलाइन, डिस्टेंस या हाइब्रिड मोड में बिना उसकी मंजूरी के कराए जा रहे एलएलएम या समकक्ष कानून पाठ्यक्रम अवैध और अमान्य हैं।
बीसीआई ने जारी की एडवाइजरी
बीसीआई ने इसको लेकर सभी हाईकोर्ट्स को 25 जून को एक एडवाइजरी भेजी है। इसमें कहा गया है कि बिना मंजूरी के कराए गए ऐसे कोर्स को किसी भी उद्देश्य के लिए मान्यता नहीं दी जाएगी। एडवाइजरी में कहा गया है कि एलएलएम (प्रोफेशनल) या एमएससी (लॉ) जैसे भ्रामक नामों से चल रहे कोर्स भी अवैध हैं। इनसे मिली डिग्री को नौकरी, शिक्षण पदों, रिसर्च रजिस्ट्रेशन या न्यायिक सेवा में प्रमोशन के लिए मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे कोर्स से मिली डिग्री को शुरू से ही शून्य माना जाएगा और उस पर भरोसा करना गलत जानकारी देना माना जाएगा।
हाईकोर्ट्स से की गई अपील
बीसीआई ने हाईकोर्ट्स से अपील की है कि वे इस एडवाइजरी को संज्ञान में लें और सुनिश्चित करें कि बिना बीसीआई की मंजूरी वाले कोर्स के आधार पर कोई नियुक्ति, प्रमोशन या शैक्षणिक निर्णय न लिया जाए। साथ ही, ऐसे उम्मीदवारों से बीसीआई की मंजूरी का प्रमाण पत्र मांगा जाए।
बिना मंजूरी कोर्स चला रहे कई संस्थानों को नोटिस
बीसीआई ने बताया कि कई प्रतिष्ठित संस्थान बिना मंजूरी के ऑनलाइन, डिस्टेंस या हाइब्रिड मोड में एलएलएम जैसे कोर्स चला रहे हैं। इनमें नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल; आईआईटी खड़गपुर; ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली जैसे संस्थान शामिल हैं। इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
‘एग्जीक्यूटिव’ नाम देकर भ्रम फैला रहे संस्थान
बीसीआई की लीगल एजुकेशन स्टैंडिंग कमेटी के को-चेयरपर्सन और दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जस्टिस (रिटायर्ड) राजेंद्र मेनन ने कहा कि कुछ संस्थान अपने कोर्स को ‘एग्जीक्यूटिव’ बताकर इसे पारंपरिक एलएलएम से अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जब इन कोर्स में एलएलएम शब्द का इस्तेमाल विज्ञापन, ब्रोशर और शैक्षणिक दस्तावेजों में किया जा रहा है, तो यह भ्रामक है और कानूनन गलत है।
एलएलएम एक रेगुलेटेड डिग्री है
बीसीआई ने कहा कि एलएलएम कोई निजी डिग्री नहीं है, यह एक वैधानिक रूप से नियंत्रित डिग्री है। इसके नाम का गलत इस्तेमाल या नियमों को दरकिनार कर ‘प्रोफेशनल’ या ‘एग्जीक्यूटिव’ एलएलएम के नाम पर कोर्स चलाना शैक्षणिक धोखाधड़ी है। ऐसे कोर्स से मिली डिग्री को यूजीसी-नेट, पीएचडी रजिस्ट्रेशन या न्यायिक सेवा में मान्यता नहीं दी जाएगी।

