Missing Najib case: दिल्ली की एक अदालत ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले में सीबीआई की जांच रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है।
नजीब का केस बंद: कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि एजेंसी ने जांच के सभी विकल्प आजमा लिए हैं, लेकिन नजीब का कोई सुराग नहीं मिला। इसके साथ ही अदालत ने केस को बंद करने की अनुमति दे दी। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केस की कानूनी प्रक्रिया तो खत्म हो रही है, लेकिन नजीब की मां और परिवार को अब भी क्लोजर नहीं मिल पाया है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि नजीब जल्द मिल जाए। कोर्ट ने कहा कि अगर नजीब की लोकेशन या उससे जुड़ी कोई विश्वसनीय जानकारी मिलती है, तो सीबीआई दोबारा जांच शुरू कर सकती है और अदालत को इसकी जानकारी देनी होगी।
कोई झगड़ा या मारपीट के सबूत नहीं मिले
जज ने कहा कि जिस दिन नजीब लापता हुआ, उस दिन उसके किसी से झगड़े या मारपीट के कोई सबूत नहीं मिले। वह हॉस्टल लौटा था, लेकिन उसके बाद क्या हुआ, इसका कोई सुराग नहीं मिला। जब वह गया, तब उसका मोबाइल और लैपटॉप कमरे में ही थे।
सीबीआई ने हर पहलू की जांच की
कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने हर संभव पहलू की जांच की, लेकिन नजीब के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। नजीब की मां की ओर से जो आपत्तियां उठाई गई थीं, उन्हें भी विस्तार से देखा गया, लेकिन वे जांच में कोई खामी साबित नहीं कर सकीं।
सीबीआई पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज
कोर्ट ने कहा कि नजीब की मां की ओर से जो याचिका दी गई थी, जिसमें सीबीआई की जांच पर सवाल उठाए गए थे, उसे खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि एक मां की पीड़ा को समझा जा सकता है, लेकिन सीबीआई की जांच में कोई लापरवाही नहीं पाई गई।
2018 में सीबीआई ने बंद की थी जांच
सीबीआई ने अक्टूबर 2018 में अपनी जांच बंद कर दी थी, क्योंकि उसे नजीब का कोई सुराग नहीं मिला। एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट से अनुमति लेकर अपनी क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की थी।
2016 में हॉस्टल से लापता हुआ था नजीब
नजीब अहमद जेएनयू में मास्टर डिग्री का पहला साल पढ़ रहा था। वह 15 अक्टूबर 2016 को माही-मांडवी हॉस्टल से लापता हो गया था। एक दिन पहले उसका कुछ छात्रों से झगड़ा हुआ था, जिनका संबंध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से बताया गया था।
मामले को बताया गया था राजनीतिक
नजीब की मां के वकील ने पहले कहा था कि यह एक राजनीतिक मामला है और सीबीआई ने अपने मालिकों के दबाव में आकर जांच की है। शुरुआत में यह केस दिल्ली पुलिस के पास था, लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया।

