Thursday, October 1, 2026
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Kailash Nagar’s Mandir:मंदिर के पुजारी और पत्नी ने किया कारनामा…अदालत भी हैरान

Kailash Nagar’s Mandir: पूर्वी दिल्ली के कैलाश नगर स्थित मंदिर परिसर में एक व्यक्ति की हत्या कर शव जलाने के मामले में पुजारी और उसकी पत्नी अदालत से दोषी करार हुए हैं।

27 सितंबर 2017 को मंदिर के कमरे में मिला था युवक का शव

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुराग ठाकुर ने पुजारी लखन दुबे और उसकी पत्नी कमलेश को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाने) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने अपने 26 दिसंबर के फैसले में कहा कि मृतक चंदर शेखर का शव 27 सितंबर 2017 को उसी मंदिर के कमरे में मिला था, जहां लखन दुबे पुजारी के रूप में काम करता था और उस कमरे तक पहुंच तथा सीढ़ी की चाबी उसी के पास थी।

आरोपियों की बेगुनाही की कोई गुंजाइश नहीं

अदालत ने कहा, “मामले में सिद्ध परिस्थितियां निर्णायक हैं और आरोपियों के दोषी होने के अलावा किसी अन्य संभावना को पूरी तरह खारिज करती हैं। साक्ष्यों की कड़ी इतनी मजबूत है कि आरोपियों की बेगुनाही की कोई गुंजाइश नहीं बचती।”अदालत ने कहा, “मानवीय संभावना के आधार पर यही निष्कर्ष निकलता है कि आरोपियों ने साजिश रचकर चंदर शेखर की हत्या की और फिर शव जलाकर व कपड़े खाली प्लॉट में फेंककर सबूत मिटाने की कोशिश की।”

यह है अभियाेजन की दलील

अभियोजन पक्ष के अनुसार, कमलेश और मृतक के बीच संबंध थे। शुरुआत में यह संबंध आपसी सहमति से था, लेकिन बाद में कमलेश ने अपने पति को बताया कि चंदर शेखर उसे बच्चों की जान से मारने की धमकी देकर संबंध बनाए रखने के लिए मजबूर कर रहा था। इसके बाद पति-पत्नी ने उसकी हत्या की साजिश रची।

यह रहा प्रोसिक्यूशन का जवाब

प्रोसिक्यूशन का कहना है कि 25 सितंबर 2017 को कमलेश ने अपने पति के बाहर होने का बहाना बनाकर चंदर शेखर को दिल्ली बुलाया, उसके खाने में नींद की गोलियां मिला दीं और बेहोश होने पर दोनों ने रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। पहचान छिपाने के लिए बाद में केरोसिन और कपूर डालकर शव को जला दिया गया।

यह रही अदालत की टिप्पणी

अदालत ने कहा कि चिकित्सकीय साक्ष्यों से मौत की वजह हत्या साबित हुई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में शव के पास केरोसिन के अवशेष और नशीले पदार्थों की पुष्टि हुई, जिससे अभियोजन की कहानी को बल मिला। इसके अलावा कॉल डिटेल रिकॉर्ड, आरोपियों की निशानदेही पर हुई बरामदगी और उनके द्वारा कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण न देना भी उनके खिलाफ गया। अदालत ने कहा कि सैंपल भेजने में देरी या सार्वजनिक गवाह न जोड़ने जैसी छोटी खामियां अभियोजन के मजबूत मामले को कमजोर नहीं करतीं।

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