Jiribam killings: मणिपुर हाईकोर्ट ने जिरिबाम हत्याकांड की जांच को लेकर नाराजगी जताई है।
यह मामला नवंबर 2023 का है
कोर्ट ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में अब तक की जांच की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करे। यह मामला नवंबर 2023 का है, जब जिरिबाम जिले के बोरबेकरा इलाके में कुकी हमार उग्रवादियों ने मीतेई समुदाय की तीन महिलाओं और तीन बच्चों की हत्या कर दी थी।
जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि घटना को सात महीने से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक न तो चार्जशीट दाखिल की गई है और न ही जांच एजेंसी ने कोई प्रगति रिपोर्ट सौंपी है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेने की बात कही है।
कोर्ट ने जताई चिंता
मुख्य न्यायाधीश के. सोमशेखर और न्यायमूर्ति अहंथेम बिमोल सिंह की खंडपीठ ने कहा कि 11 नवंबर 2023 को घटना के दिन ही एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बावजूद अब तक जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है। कोर्ट ने कहा कि अगर चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती है, तो इसे गंभीरता से देखा जाएगा।
अगली सुनवाई 24 जुलाई को
कोर्ट ने एनआईए को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई से पहले यानी 24 जुलाई तक इस मामले में विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करे।
यह हुआ था 11 नवंबर को
11 नवंबर 2023 को कुकी हमार उग्रवादियों ने जिरिबाम जिले के बोरबेकरा इलाके से मीतेई समुदाय की तीन महिलाओं और तीन बच्चों का अपहरण कर लिया था। इनमें एक 10 महीने का बच्चा भी शामिल था। 15 नवंबर को इन सभी के गोलियों से छलनी शव मणिपुर-असम सीमा पर बहने वाली बराक नदी से बरामद हुए थे। इस हमले में दो अन्य नागरिकों की भी हत्या कर दी गई थी और कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया था।

