Supreme Court in view
SC LIMITATION: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006 के तहत होने वाली मध्यस्थता (arbitration) प्रक्रिया पर लिमिटेशन एक्ट लागू होगा। यानी, कानूनी विवादों को तय समयसीमा में ही मध्यस्थता के जरिए सुलझाना होगा।
हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा
एक अहम फैसले में हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि MSMED एक्ट के तहत पक्षों के बीच होने वाली सुलह (conciliation) प्रक्रिया पर लिमिटेशन एक्ट लागू नहीं होगा। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा, “हमने हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि MSMED एक्ट के तहत मध्यस्थता प्रक्रिया पर लिमिटेशन एक्ट लागू होता है।”
समयसीमा खत्म होने के बाद भी सुलह संभव
कोर्ट ने कहा कि लिमिटेशन एक्ट, MSMED एक्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी भी पुराने फैसले में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो समयसीमा खत्म होने के बाद सुलह प्रक्रिया पर रोक लगाता हो। जस्टिस नरसिम्हा ने 51 पेज के फैसले में लिखा, “MSMED एक्ट की धारा 18(2) के तहत होने वाली सुलह प्रक्रिया पर लिमिटेशन एक्ट लागू नहीं होता। समयसीमा खत्म होने के बाद भी दावा सुलह के लिए भेजा जा सकता है, क्योंकि लिमिटेशन खत्म होने से दावा खत्म नहीं होता। ऐसे मामलों में सुलह समझौते के जरिए राशि वसूली संभव है।”
बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला आंशिक रूप से रद्द
यह फैसला उन याचिकाओं पर आया, जिनमें एक याचिका सोनाली पावर इक्विपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 2023 के उस फैसले को आंशिक रूप से रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि लिमिटेशन एक्ट MSMED एक्ट के तहत सुलह और मध्यस्थता दोनों पर लागू होता है।
मुख्य बातें टाइटल के साथ:
- मध्यस्थता पर लागू होगा लिमिटेशन एक्ट
MSMED एक्ट के तहत होने वाली मध्यस्थता प्रक्रिया पर लिमिटेशन एक्ट लागू होगा। यानी, कानूनी दावे तय समयसीमा में ही किए जा सकेंगे। - सुलह प्रक्रिया पर नहीं लागू होगा लिमिटेशन
कोर्ट ने कहा कि MSMED एक्ट की सुलह प्रक्रिया पर लिमिटेशन एक्ट लागू नहीं होता। समयसीमा खत्म होने के बाद भी सुलह की जा सकती है। - दावा खत्म नहीं होता, सिर्फ प्रक्रिया सीमित होती है
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिमिटेशन खत्म होने से दावा खत्म नहीं होता। ऐसे मामलों में सुलह समझौते के जरिए राशि वसूली संभव है। - हाईकोर्ट का फैसला आंशिक रूप से रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को आंशिक रूप से रद्द किया, जिसमें सुलह और मध्यस्थता दोनों पर लिमिटेशन एक्ट लागू बताया गया था।






