Friday, October 2, 2026
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Delhi Court: द्वारका जिला अदालत…आरोपियों से कोर्ट के उठने तक हाथ ऊपर उठाकर खड़े रहने के निर्देश

Delhi Court: द्वारका जिला अदालत ने चार आरोपियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए पूरे दिन हाथ ऊपर उठाकर खड़े रहने की सजा दी।

2018 के एक शिकायत मामले की सुनवाई कर रहे थे

राजधानी दिल्ली की द्वारका जिला अदालत ने हाल ही में कोर्ट की कार्यवाही में देरी और समय की बर्बादी करने वाले कुछ याचिकाकर्ताओं को 15 जुलाई को ऐसी सजा सुनाई, जो आमतौर पर स्कूलों में बच्चों को दी जाती है। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ गोयल 2018 के एक शिकायत मामले की सुनवाई कर रहे थे, जो प्री-चार्ज साक्ष्य चरण में था। आरोपियों के नाम कुलदीप, राकेश, उपासना और आनंद हैं, जबकि दो अन्य आरोपियों की मौत हो चुकी है। मामले में शिकायतकर्ता की ओर से वकील संदीप शौकीन पेश हुए। आरोपी उपासना और आनंद की ओर से वकील तपिश सहरावत पेश हुए। आरोपी कुलदीप और राकेश का प्रतिनिधित्व वकील हेमंत कपूर ने किया। मामले में 29 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रहनुमाई की जाएगी। वैसे प्री-चार्ज साक्ष्य चरण के लिए मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।

यूं देरी पर भड़का कोर्ट

15 जुलाई को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सौरभ गोयल एक शिकायत पर विचार कर रहे थे। उसी वक्त उन्होंने पाया कि सुबह 10 बजे से 11:40 बजे तक दो बार बुलाने और इंतजार करने के बावजूद आरोपियों ने जमानती बॉन्ड पेश नहीं किया। जज ने कहा कि पिछली तारीख पर उन्हें ये बांड भरने का आदेश दिया था। इस तरह अदालत का समय बर्बाद करने और पिछली तारीख के आदेश का उल्लंघन करने के लिए आरोपियों को अदालत की अवमानना का दोषी माना गया। उन्हें आईपीसी की धारा 228 (न्यायिक कार्यवाही में जानबूझकर बाधा डालना या अपमान करना) के तहत दोषसिद्ध किया जाता है। मजिस्ट्रेट ने आगे कहा, उन्हें आदेश दिया जाता है कि वे अदालत के उठने तक हाथ सीधे ऊपर उठाकर खड़े रहें।

आरोपी कुलदीप को भेजा न्यायिक हिरासत में, बाद में दी जमानत बांड

सुबह से इंतजार करने के बावजूद, आरोपी कुलदीप ने जमानत बांड नहीं भरे। इस कारण उसे अदालत ने 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में भेज दिया। हालांकि, उसके वकीलों ने दोपहर लगभग 12:48 बजे इस मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उसके ज़मानत बांड और ज़मानत राशि उपलब्ध है। इसके बाद अदालत ने उसे रिहा कर दिया। न्यायाधीश गोयल ने आदेश दिया, कुलदीप को 10,000 रुपये की राशि के पी/बी और एस/बी जमा करने पर जमानत दी जाती है। आवश्यक ज़मानत बांड जमा किए गए हैं। इन्हें सत्यापित और स्वीकार किया जाता है।

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