Sunday, September 20, 2026
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Citizenship case: स्वतंत्रता से पहले भारत में जन्मे माता-पिता के आधार पर ही मिलेगा भारतीय मूल का दर्जा…यह रही कोर्ट की टिप्पणी

Citizenship case:दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, भारतीय मूल का व्यक्ति’ (Person of Indian Origin – PIO) तभी माना जा सकता है, जब उसके माता-पिता में से कोई एक 15 अगस्त 1947 से पहले अविभाजित भारत में जन्मे हों।

कोर्ट ने केंद्र की दलील मानी

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता के लिए पंजीकरण के आधार पर ‘भारतीय मूल का व्यक्ति’ (Person of Indian Origin – PIO) काे लेकर यह फैसला सुनाया। दरअसल एक 17 वर्षीय लड़की, जो भारत में जन्मी है लेकिन उसके माता-पिता अमेरिकी नागरिक हैं। अदालत ने केंद्र की दलील से सहमति जताते हुए कहा कि नागरिकता अधिनियम की धारा 5(1)(g) में दी गई व्याख्या 2 के अनुसार, PIO का दर्जा केवल उन्हीं को मिलेगा जिनके माता-पिता में से कोई एक 15 अगस्त 1947 से पहले अविभाजित भारत में जन्मा हो। कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत में जन्मे माता-पिता के आधार पर PIO का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

यह है लड़की का मुद्दा

यह मामला रचिता फ्रांसिस जेवियर नाम की लड़की से जुड़ा है, जिसका जन्म 2006 में आंध्र प्रदेश में हुआ था। उसके माता-पिता भारतीय मूल के हैं, लेकिन उन्होंने 2001 और 2005 में अमेरिकी नागरिकता ले ली थी। रचिता ने 2019 में भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे यह कहकर खारिज कर दिया गया कि वह भारतीय नागरिक नहीं मानी जा सकती क्योंकि उसके माता-पिता विदेशी नागरिक हैं। इससे वह ‘राज्यविहीन’ (stateless) हो गई।

पहले मिला था सिंगल जज से राहत

मई 2023 में जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि रचिता को नागरिकता दी जाए, क्योंकि वह नागरिकता अधिनियम की धारा 5 के तहत ‘भारतीय मूल की व्यक्ति’ मानी जा सकती है। जज ने कहा था कि उसके माता-पिता भारत में जन्मे थे और बाद में अमेरिकी नागरिक बने, इसलिए रचिता को यह दर्जा मिलना चाहिए।

केंद्र ने फैसले को चुनौती दी

केंद्र सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि ‘भारतीय मूल’ की परिभाषा में केवल वे लोग आते हैं जिनके माता-पिता का जन्म स्वतंत्रता से पहले भारत में हुआ हो। सरकार ने कहा कि नागरिकता अधिनियम की धारा 5(1)(g) के तहत दी गई व्याख्या 2 के अनुसार, केवल वही व्यक्ति PIO माने जाएंगे जिनके माता-पिता में से कोई एक 15 अगस्त 1947 से पहले अविभाजित भारत में जन्मा हो।

सिंगल जज का फैसला गलत बताया

कोर्ट ने जस्टिस प्रतिभा सिंह के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कानून की गलत व्याख्या की। कोर्ट ने कहा कि उनके फैसले के पैराग्राफ 41 और 52 में जो निष्कर्ष निकाले गए हैं, वे नागरिकता अधिनियम की धारा 5(1)(g) की व्याख्या 2 की गलत समझ पर आधारित हैं।

यह लिया गया निष्कर्ष

इस फैसले के बाद अब केवल वही लोग भारतीय मूल के व्यक्ति माने जाएंगे, जिनके माता-पिता में से कोई एक स्वतंत्रता से पहले भारत में जन्मा हो। इससे उन लोगों को झटका लगा है जो स्वतंत्रता के बाद भारत में जन्मे माता-पिता के आधार पर भारतीय नागरिकता पाना चाहते हैं।

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