Bombay HC: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गाजा में कथित नरसंहार के खिलाफ प्रदर्शन की इजाजत मांगने वाली सीपीएम की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई थी
कोर्ट ने कहा कि पार्टी को देश के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि हजारों किलोमीटर दूर की घटनाओं पर। कोर्ट के इस रुख की सीपीएम ने कड़ी आलोचना की है। सीपीएम ने यह याचिका तब दायर की थी जब मुंबई पुलिस ने ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गनाइजेशन को आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई थी।
सीपीएम की ओर से वकील ने कोर्ट में दलील दी
सीपीएम की ओर से वकील मिहिर देसाई ने कोर्ट में दलील दी कि नागरिकों को प्रदर्शन करने का अधिकार है और सिर्फ कानून-व्यवस्था की आशंका के आधार पर इसे रोका नहीं जा सकता। लेकिन कोर्ट ने यह तर्क नहीं माना। सीपीएम ने कोर्ट की टिप्पणी को संविधान और भारत की विदेश नीति के खिलाफ बताया। पार्टी ने कहा कि कोर्ट ने न सिर्फ प्रदर्शन के अधिकार को नजरअंदाज किया, बल्कि पार्टी की देशभक्ति पर भी सवाल उठाए।
सीपीएम का आरोप: कोर्ट केंद्र सरकार की लाइन पर
सीपीएम ने कहा कि कोर्ट की टिप्पणियां केंद्र सरकार के रुख से मेल खाती हैं। पार्टी ने कहा कि महात्मा गांधी, आजादी की लड़ाई और आजाद भारत की विदेश नीति हमेशा फिलिस्तीन के स्वतंत्रता संघर्ष के साथ रही है। सीपीएम ने यह भी कहा कि कोर्ट ने संयुक्त राष्ट्र और इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस जैसी वैश्विक संस्थाओं की इजरायल के खिलाफ की गई आलोचना को भी नजरअंदाज कर दिया।

