Tuesday, September 8, 2026
HomeLaworder HindiClerical error: गैंगस्टर एक्ट में नाम दर्ज होने की clerical गलती से...

Clerical error: गैंगस्टर एक्ट में नाम दर्ज होने की clerical गलती से 22 दिन जेल में रहा, 300 बार कोर्ट जाना पड़ा

Clerical error: 62 साल के राजवीर को 17 साल बाद कोर्ट से इंसाफ मिला है।

24 जुलाई 2025 को हुआ बरी

गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एक केस में उन्हें 24 जुलाई 2025 को बरी कर दिया गया। इस केस में उनका नाम गलती से दर्ज हो गया था। असली आरोपी उनके भाई रामवीर थे, लेकिन पुलिस ने रिकॉर्ड में राजवीर का नाम लिख दिया। इस गलती की वजह से राजवीर को 22 दिन जेल में रहना पड़ा और 17 साल तक कोर्ट के चक्कर काटने पड़े।

2012 में केस आगरा से मैनपुरी ट्रांसफर हुआ

2012 में केस आगरा से मैनपुरी ट्रांसफर हुआ। तब से अब तक राजवीर करीब 300 बार कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान उनका पारिवारिक जीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। वकील ने बताया कि राजवीर की दो बेटियां हैं, जिनमें से एक दिव्यांग है। दोनों की शादी हो चुकी है। उनका बेटा गौरव स्कूल छोड़कर खेतों में मजदूरी करने लगा। राजवीर की सारी जमा पूंजी केस में खर्च हो गई। समाज में उनकी छवि खराब हुई और परिवार भी टूट गया।

कोर्ट ने माना- पुलिस की लापरवाही से निर्दोष को भुगतना पड़ा

24 जुलाई को स्पेशल जज स्वप्ना दीप सिंघल ने राजवीर को बरी करते हुए कहा कि पुलिस और प्रशासन की भारी लापरवाही के कारण एक निर्दोष व्यक्ति को 22 दिन जेल में रहना पड़ा और 17 साल तक झूठे केस का सामना करना पड़ा। अब राजवीर मैनपुरी स्थित अपने घर में रहते हैं। उम्र और संघर्ष के बोझ से उनका शरीर झुक गया है।

वकील ने कहा- इंसाफ मिला, लेकिन बहुत देर से

राजवीर के वकील ने कहा, “इंसाफ मिला जरूर, लेकिन बहुत देर से। किसी भी निर्दोष को 17 साल तक सिस्टम से लड़ने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। राजवीर के वकील विनोद कुमार यादव ने बताया कि उनके मुवक्किल ने बार-बार कहा कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 22 दिन बाद जमानत मिली, लेकिन इसके बाद शुरू हुआ लंबा कानूनी संघर्ष।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
moderate rain
29 ° C
29 °
29 °
94 %
0kmh
100 %
Mon
29 °
Tue
33 °
Wed
34 °
Thu
34 °
Fri
33 °

Recent Comments