Wednesday, May 20, 2026
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Dog’s Watch-1: आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखें…कोई व्यक्ति या संस्था प्रक्रिया में बाधा डाले तो अवमानना माना जाए

Dog’s Watch-1: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखने का निर्देश दिया।

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इन कुत्तों को दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा।

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इन कुत्तों को दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा। यह आदेश राजधानी में कुत्तों के काटने और रेबीज के मामलों को लेकर स्वतः संज्ञान में लिए गए केस की सुनवाई के दौरान दिया गया। कोर्ट ने इन घटनाओं को ‘बेहद गंभीर’ बताया और कहा कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था इस प्रक्रिया में बाधा डालेगी तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार की प्राथमिकता: लोगों को राहत देना

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिल्ली के लोग वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। पहले की सरकारों और नगर निगमों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। हमारी सरकार बनने के बाद हमने इस पर चर्चा शुरू की और स्थायी समाधान की दिशा में काम किया। अब यह समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है, इसलिए हम एक ठोस और मानवीय योजना के साथ आगे बढ़ेंगे। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि राजधानी में आवारा कुत्तों की समस्या अब गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है। इसे हल करने के लिए सरकार एक व्यापक और सुव्यवस्थित योजना बनाएगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सरकार बेहद गंभीरता से ले रही है और इसका उद्देश्य दिल्लीवासियों को राहत देना है।

समयबद्ध तरीके से होगा कोर्ट आदेश का पालन

दिल्ली के विकास और पशुपालन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को समयबद्ध तरीके से लागू करेगी। उन्होंने कहा कि यह आदेश दिल्लीवासियों को रेबीज और आवारा जानवरों के डर से राहत दिलाने की दिशा में एक रास्ता दिखाता है।

सभी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगी सरकार

कपिल मिश्रा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में पशुपालन विभाग सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर इस आदेश का अध्ययन करेगा और इसके सही क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ेगा।

जानवरों की भलाई का भी रखा जाएगा ध्यान

मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से अब रास्ते की सभी बाधाएं हट गई हैं। हम इन निर्देशों को जानवरों के प्रति संवेदनशीलता और देखभाल के साथ लागू करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि पहले के नियमों के अनुसार नसबंदी के बाद कुत्तों को उनकी जगह पर वापस छोड़ा जाता था, लेकिन अब कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें शेल्टर में रखा जाएगा।

पहले से चल रहा था काम

दिल्ली सरकार पहले से ही शहर के विभिन्न हिस्सों से आ रही कुत्तों के काटने की शिकायतों पर काम कर रही थी। पिछले हफ्ते कपिल मिश्रा ने कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर एक मानवीय नीति बना रही है। इसके लिए पशु प्रेमियों के साथ बैठकें भी की गई थीं।

अब कोई समझौता नहीं, आठ हफ्ते में शेल्टर बनाएं

कोर्ट ने दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद की नगर निकायों को आदेश दिया कि वे जल्द से जल्द सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाकर स्थायी रूप से शेल्टर होम में रखें। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और नगर निकायों को निर्देश दिया कि वे तुरंत डॉग शेल्टर बनाना शुरू करें और आठ हफ्तों के भीतर इस पर रिपोर्ट सौंपें। कोर्ट ने कहा कि इन शेल्टर में पर्याप्त स्टाफ होना चाहिए, जो कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कर सके।

शेल्टर की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाएं

कोर्ट ने यह भी कहा कि एक बार कुत्तों को शेल्टर में ले जाने के बाद उन्हें दोबारा सड़कों, कॉलोनियों या सार्वजनिक जगहों पर नहीं छोड़ा जाए। शेल्टर की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि कोई कुत्ता बाहर न निकले। कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को “प्रगतिशील कदम” बताया और कहा कि अगले छह से आठ हफ्तों में करीब 5,000 कुत्तों के लिए शेल्टर तैयार किए जाएं। कोर्ट ने साफ कहा कि इस काम में कोई लापरवाही या समझौता नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था इस प्रक्रिया में बाधा डालती है, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी कीमत पर नवजात और छोटे बच्चों को कुत्तों के काटने और रेबीज का शिकार नहीं बनने दिया जा सकता।

महत्वपूर्ण निर्देश:

  • सभी पकड़े गए कुत्तों का रिकॉर्ड रखा जाए और उन्हें शेल्टर में ही रखा जाए।
  • एक हफ्ते के भीतर डॉग बाइट की शिकायत दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन शुरू की जाए।
  • कुत्ते के काटने पर पीड़ितों को तुरंत इलाज की जानकारी दी जाए।
  • रेबीज वैक्सीन कहां उपलब्ध है और उसका स्टॉक कितना है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
  • कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति बेहद गंभीर है और इससे निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने जरूरी हैं।
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