Supreme Court India
ANTICIPATORY BAIL: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह यह तय करेगा कि अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए सीधे हाईकोर्ट जाना पक्षकार की मर्जी होगी या फिर पहले सेशंस कोर्ट जाना जरूरी शर्त है।
केवल केरल हाईकोर्ट में ऐसी प्रैक्टिस
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि केरल हाईकोर्ट में नियमित रूप से बिना सेशंस कोर्ट जाए सीधे अग्रिम जमानत याचिकाएं सुनी जा रही हैं। कोर्ट ने सवाल किया—“ऐसा क्यों है? देश के किसी और राज्य में यह नहीं होता।”
BNSS का हवाला
बेंच ने कहा कि पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और नई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 दोनों में एक स्पष्ट न्यायिक ढांचा तय है। सेक्शन 482 में गिरफ्तारी की आशंका वाले व्यक्ति को जमानत देने का प्रावधान है।
यह है केस की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट दो याचिकाकर्ताओं की अपील सुन रहा था, जिनकी अग्रिम जमानत याचिका को केरल हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता सीधे हाईकोर्ट पहुंचे थे और सेशंस कोर्ट नहीं गए थे।
“गलत रिकॉर्डिंग का खतरा”
बेंच ने कहा कि जब हाईकोर्ट सीधे ऐसे मामलों को सुनता है तो कई बार वे तथ्य सामने नहीं आ पाते, जो सेशंस कोर्ट में आ सकते थे।
अगली सुनवाई 14 अक्टूबर
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर केरल हाईकोर्ट से जवाब मांगा है और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा को अमाइकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है। अब मामले की सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।






