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Karisma Kapoor wealth: करिश्मा कपूर के बच्चों का दावा – पिता संजय कपूर की संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर विवाद

Karisma Kapoor wealth: अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चे दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे हैं और उन्होंने अपने पिता संजय कपूर की संपत्ति में हिस्सा मांगा है।

प्रिया सचदेवा के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए गए

बच्चों द्वारा दायर मुकदमे में प्रिया सचदेवा के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जो इस समय संपत्ति से जुड़े अहम पहलुओं पर नियंत्रण रखती हैं। बच्चों ने अदालत में एस्टेट के बंटवारे, हिसाब-किताब की जानकारी और स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की है। उनका आरोप है कि पिता की मौत के बाद प्रिया सचदेवा ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज या जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया और उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले कदम उठाए।

वसीयत का विवाद

मुकदमे का मुख्य आरोप है कि संजय कपूर की 21 मार्च 2025 की कथित आखिरी वसीयत अचानक सामने आई। बच्चों का कहना है कि उन्हें लगातार बताया गया कि कोई वसीयत मौजूद नहीं है। पिता की मौत के सात हफ्ते बाद एक बैठक में वसीयत के निष्पादक ने दस्तावेज़ को संक्षेप में दिखाया, लेकिन पूरी प्रति साझा नहीं की। बच्चों का तर्क है कि वसीयत के इस तरह अचानक सामने आने से संदेह गहरा हो गया है, खासकर जब यह दो ऐसे लोगों के जरिए पेश की गई जो प्रिया सचदेवा से निकट रूप से जुड़े हुए हैं।

पारदर्शिता की कमी

बच्चों का दावा है कि पिता की मौत के समय उन्हें बताया गया था कि संजय कपूर की सारी संपत्ति आर.के. फैमिली ट्रस्ट के अंतर्गत है। जुलाई 25, 2025 को होने वाली एजीएम (Annual General Meeting) में उनसे ट्रस्ट से जुड़े फॉर्म्स पर हस्ताक्षर करवाने की बात कही गई थी। लेकिन अचानक उन्हें फोन कर बताया गया कि अब उनकी उपस्थिति आवश्यक नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों और उनकी मां को न तो ट्रस्ट डीड दिखाई गई और न ही ट्रस्ट की संपत्तियों का पूरा ब्यौरा दिया गया।

पहले वसीयत न होने की बात कही गई थाी

मुकदमे में कहा गया है कि प्रिया सचदेवा का रवैया संदिग्ध है। पहले वसीयत न होने की बात कही गई और फिर हफ्तों बाद अचानक वसीयत का प्रकट होना सामान्य आचरण नहीं है। बच्चों का आरोप है कि यह दस्तावेज़ कृत्रिम रूप से तैयार किया गया हो सकता है या फिर संदेहास्पद परिस्थितियों में सामने आया है। बच्चों ने पिता की निजी संपत्ति और प्रभावों में अपने हिस्से की मांग की है। उनका कहना है कि कानूनी वारिस होने के नाते उन्हें पारदर्शिता और न्यायपूर्ण बंटवारे का अधिकार है। अब अदालत को इस तथाकथित वसीयत की वैधता, फैमिली ट्रस्ट की स्थिति और प्रिया सचदेवा की भूमिका की जांच करनी होगी।

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