Thursday, November 5, 2026
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Sexual harassment: अदालत में शेक्सपीयर की पंक्तियों का हवाला दिया…जानिए क्या था केस

Sexual harassment: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, सख्त कानून होने के बावजूद कार्यस्थलों पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न खत्म नहीं हुआ है।

पुरुषों की मानसिकता अब भी नहीं बदली

अदालत ने यह भी कहा, खासकर तब जब इसमें पावर डायनेमिक्स जुड़ा होता है, क्योंकि पुरुषों की मानसिकता अब भी नहीं बदली है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 28 अगस्त को आदेश सुनाते हुए शेक्सपीयर की पंक्तियों का हवाला दिया – “पहले मेरा डर, फिर मेरी शिष्टता, और अंत में मेरी वाणी। मेरा डर है आपका अप्रसन्न होना, मेरी शिष्टता है मेरा कर्तव्य निभाना और मेरी वाणी है आपकी क्षमा मांगना।” अदालत ने कहा कि ये पंक्तियाँ महिलाओं के जीवन को — घर हो या दफ़्तर — सटीक रूप से बयान करती हैं।

मामला और अदालत की टिप्पणियां

यह आदेश जम्मू-कश्मीर के एक सरकारी अधिकारी आसिफ़ हामिद खान की अपील को खारिज करते हुए दिया गया। उन पर दिसंबर 2014 में महिला सहकर्मी से यौन उत्पीड़न, आपराधिक डराने-धमकाने और उसकी अस्मिता भंग करने का आरोप है। अदालत ने कहा कि यह मामला उस समाज का प्रतिबिंब है जहाँ बार-बार समानता और सुरक्षित कार्यस्थल की बातें होने और सख्त कानून बनने के बावजूद महिलाओं को अब भी मानसिकता और सोच के कारण उत्पीड़न झेलना पड़ता है। कोर्ट ने टिप्पणी की “यह याचिका कार्यस्थल पर अन्याय झेल चुकी महिला के न्याय पाने के संघर्ष का एक और उदाहरण है। उच्च शिक्षा या बड़ा सरकारी पद भी महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा नहीं देता।”

याचिका पर फैसला

खान ने दलील दी थी कि उन्हें विभागीय जांच में बरी कर दिया गया था और ट्रायल कोर्ट ने क्लोज़र रिपोर्ट के बावजूद उन्हें समन जारी किया। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में बरी होना FIR से मुक्ति का आधार नहीं बन सकता और ट्रायल कोर्ट ने सही तरीके से क्लोज़र रिपोर्ट को खारिज कर संज्ञान लिया।

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