Supreme Court View
RAPE-WITNESS: पश्चिम बंगाल की एक ट्रायल कोर्ट में रेप पीड़िता की टुकड़ों-टुकड़ों में हो रही गवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
जिरह टालने के पीछे की वजह पूछा गया
अदालत ने पूछा कि जब पीड़िता गवाही के लिए गवाह-घोष्ठ पर आ ही चुकी थीं, तो उनकी आगे की जिरह को चार महीने बाद के लिए क्यों टाल दिया गया। जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा, “हमें समझ नहीं आता कि जब पीड़िता खुद गवाही देने पहुंची थीं, तो उसकी गवाही अधूरी क्यों छोड़ी गई। ट्रायल कोर्ट को इस बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।”
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां
- गवाही में देरी कर ट्रायल कोर्ट ने अनजाने में ही आरोपियों को गवाहों से छेड़छाड़ का मौका दिया है।
- यह गंभीर चिंता का विषय है और CBI व सरकारी वकील को भी जवाब देना होगा कि पीड़िता को इतनी देर बाद गवाह-घोष्ठ पर क्यों बुलाया गया।
- अदालत ने कहा कि पीड़िता को तो पहला गवाह बनाया जाना चाहिए था।
यह है मामले की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट CBI की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पिछले साल सितंबर में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा एक आरोपी को दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत को बताया गया कि पीड़िता ने पहले ही गवाही देना शुरू कर दिया था, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने अगली सुनवाई 18 दिसंबर के लिए टाल दी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश
ट्रायल कोर्ट से एक रिपोर्ट तलब की गई है, जिसमें अब तक कितने गवाहों की गवाही हो चुकी है और पीड़िता को आखिरी बार कब गवाही के लिए बुलाया गया था, यह जानकारी देनी होगी। यह रिपोर्ट एक हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट को भेजनी होगी। आरोपी को भी एक सप्ताह में काउंटर हलफनामा दाखिल करने का समय दिया गया है। अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।





