Supreme Court View
Material Benefit : सुप्रीम कोर्ट ने एक शैक्षणिक संस्था के प्रमुख के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी का केस खारिज कर दिया।
इमारत की ऊंचाई 14.20 मीटर, ताे एनओसी की जरूरत नहीं
दरअसल, उन पर आरोप था कि उन्होंने कॉलेज की संबद्धता (Affiliation) के लिए फायर विभाग का फर्जी एनओसी (No Objection Certificate) लगाया। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह मामला धोखाधड़ी या जालसाजी के दायरे में नहीं आता, क्योंकि 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली शैक्षणिक इमारतों के लिए फायर एनओसी लेना जरूरी ही नहीं है। संबंधित कॉलेज की इमारत की ऊंचाई 14.20 मीटर थी।
यह रही अदालत की टिप्पणी
अदालत ने साफ किया कि IPC की धारा 420 (चीटिंग) तभी लागू होती है जब कोई झूठा दस्तावेज देकर सामने वाले को गुमराह कर गलत फायदा उठाए या उसे नुकसान पहुंचाए। यहां ऐसा कोई “डिशॉनस्ट इंड्यूसमेंट” (बेईमानी से प्रेरित कराना) नहीं था। कोर्ट ने यह भी माना कि IPC की धारा 468 और 471 (फर्जी दस्तावेज और जालसाजी से जुड़े अपराध) भी लागू नहीं होते, क्योंकि एनओसी का कोई असर कॉलेज की संबद्धता पर नहीं पड़ता था और न ही गलत मंशा (Mens Rea) साबित हुई। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए कॉलेज हेड की अपील स्वीकार कर केस खत्म कर दिया।
CRIMINAL APPEAL NO. OF 2025
(Arising out of SLP (Crl.) No.9744 of 2024)
Jupally Lakshmikantha Reddy .… Appellant(s) Versus State of Andhra Pradesh & Anr. …. Respondent(s)





