PM’s features case: पटना हाईकोर्ट ने बिहार कांग्रेस द्वारा जारी उस एआई-जनरेटेड वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां हीराबेन मोदी को दिखाया गया है।
अगले आदेश तक वीडियो क्लिपिंग को न प्रसारित करें
17 सितंबर 2025 को कोर्ट ने कहा कि यदि यह वीडियो अब भी प्रसारित हो रहा है, तो इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स इसे तुरंत रोकें। कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों — जैसे केएस पुट्टास्वामी, नालसा फाउंडेशन, सुब्रमण्यम स्वामी आदि का हवाला दिया, जिनमें निजता और गरिमा को व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हिस्सा बताया गया है। बेंच (कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पी.बी. बजांत्री और न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा) ने आगे आदेश दिया कि “आगे किसी भी तरह की क्षति से बचने के लिए प्रतिवादी 6 से 8 (मेटा प्लेटफॉर्म्स, गूगल इंडिया-यूट्यूब और एक्स-ट्विटर इंडिया) को निर्देशित किया जाता है कि अगले आदेश तक इस वीडियो क्लिपिंग को न प्रसारित करें।”
प्रधानमंत्री पर यह सबसे घटिया प्रकार की बदनामी है: दलील
यह आदेश विवेकानंद सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। कोर्ट ने केंद्र सरकार, बिहार सरकार, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी, चुनाव आयोग और राहुल गांधी को भी नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया कि वीडियो “घृणित, अपमानजनक, अरुचिकर और गरिमा का हनन करने वाला” है, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री की दिवंगत मां को अपमानजनक ढंग से दर्शाया गया है। वीडियो में दिखाया गया कि पीएम मोदी नींद में सपना देख रहे हैं और उनकी मां उन्हें उनकी नीतियों के लिए डांट रही हैं। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार ने दलील दी कि वीडियो पितृ पक्ष के पवित्र समय में जारी किया गया, जब प्रधानमंत्री अपनी मां के लिए तर्पण कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वीडियो में पीएम की मां उन्हें नोटबंदी जैसी नीतियों पर ताना मारती दिखती हैं, जबकि नोटबंदी को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था। अधिवक्ता ने कहा, “प्रधानमंत्री पर यह सबसे घटिया प्रकार की बदनामी है।

