Sunday, August 16, 2026
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STUBBLE BURNING: किसानों की वजह से हम खा रहे हैं, लेकिन पर्यावरण की रक्षा न हो क्या…यह रही सुप्रीम टिप्पणी

STUBBLE BURNING: सर्दियों में हर साल प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है।

क्यों न जुर्माने या जेल का प्रावधान किया जाए?

सुप्रीम अदालत ने पंजाब सरकार से सवाल किया कि पराली जलाने वाले किसानों को क्यों न गिरफ्तार किया जाए, ताकि सख्त संदेश दिया जा सके। पराली जलाना प्रदूषण का एक बड़ा कारण माना जाता है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कड़े तेवर दिखाए। कोर्ट ने कहा, “आप कार्रवाई करें, नहीं तो हम आदेश (मैंडमस) जारी करेंगे।”

यह मामला यूपी, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब का


यह मामला यूपी, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में रिक्तियों को भरने से जुड़ी स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा। कोर्ट ने इन राज्यों, सीएक्यूएम (CAQM) और सीपीसीबी (CPCB) से तीन महीने के भीतर खाली पद भरने को कहा। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा से पूछा – “किसानों की वजह से हम खा रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पर्यावरण की रक्षा न हो। क्यों न जुर्माने या जेल का प्रावधान किया जाए? अगर कुछ लोग जेल जाएंगे तो सही संदेश जाएगा। अगर सचमुच पर्यावरण बचाने की नीयत है तो पीछे क्यों हट रहे हैं?”

पराली को बायोफ्यूल के रूप में भी इस्तेमाल संभव

सीजेआई ने कहा कि उन्होंने अखबारों में पढ़ा है कि पराली को बायोफ्यूल के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। “हम इसे हर पांच साल पर दोहराई जाने वाली कवायद नहीं बना सकते,” उन्होंने टिप्पणी की। बेंच ने पंजाब सरकार की पराली रोकने की सख्त व्यवस्था न होने पर नाराज़गी जताई। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और दिल्ली के किसान फसल कटाई के बाद खेत जल्दी साफ करने के लिए पराली जलाते हैं। मेहरा ने दलील दी कि पंजाब सरकार कई कदम उठा चुकी है और प्रदूषण का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। उन्होंने कहा – “तीन साल में पराली जलाने की घटनाएं 77 हजार से घटकर 10 हजार रह गई हैं।”वकील ने कहा कि छोटे किसानों (करीब एक हेक्टेयर जमीन वाले) की गिरफ्तारी से उनके परिवार पर भारी असर पड़ेगा। जब कोर्ट ने पूछा कि पराली जलाना किस कानून के तहत प्रतिबंधित है, तो जवाब मिला कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA) में यह प्रावधान है। लेकिन कोर्ट को बताया गया कि इसके तहत आपराधिक प्रावधान हटा दिए गए हैं।

ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश के लिए समय मांगा

सीजेआई ने सवाल किया – “यह क्यों हटाया गया? अगर लोग जेल जाएंगे तो सही संदेश जाएगा।” सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि सब्सिडी, उपकरण और 2018 से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद जमीनी हालात ज्यादा नहीं बदले। किसानों ने यहां तक कहा कि जब उपग्रह उनकी जमीनों के ऊपर से नहीं गुजरते, तो उन्हें पराली जलाने के लिए कहा जाता है।सीजेआई ने साफ किया कि गिरफ्तारी हर बार जरूरी नहीं, लेकिन उदाहरण पेश करने के लिए हो सकती है। “रूटीन में नहीं, लेकिन संदेश देने के लिए। नियामक एजेंसियों की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट से समय मांगा ताकि ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश की जा सके। गौरतलब है कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिवों को इस मुद्दे पर तलब किया था।

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