Monday, August 17, 2026
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Irregularities in the recruitment process: यूपी के एक केस पर सुप्रीम टिप्पणी… बेहद असाधारण हालात में दें सीबीआई जांच के आदेश

Irregularities in the recruitment process: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद सचिवालयों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है।

बिना किसी ठोस सबूत या पक्षकारों की मांग के CBI जांच का आदेश दे दिया

जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपनी सीमा से आगे जाकर लंबित अपील को स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) जनहित याचिका में बदल दिया और बिना किसी ठोस सबूत या पक्षकारों की मांग के CBI जांच का आदेश दे दिया। अदालत ने कहा, CBI जांच एक असाधारण कदम है, जो केवल तभी लिया जा सकता है जब राज्य की जांच एजेंसियां समझौता कर चुकी हों या मामला राष्ट्रीय महत्व का हो। यहां ऐसा कुछ भी स्थापित नहीं हुआ।

मामला क्या है

यह विवाद 2020 में जारी दो विज्ञापनों के जरिए विधान परिषद सचिवालय की विभिन्न भर्तियों से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया को मनमाना, पक्षपातपूर्ण और मिलीभगत वाला बताते हुए इसे रद्द करने और नई भर्ती कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आदेश दिया था कि आगे से विधानसभा और परिषद की क्लास-III भर्ती यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के जरिए हो। इसके खिलाफ विशेष अपील दायर की गई थी। बाद में, एक अन्य याचिका में परीक्षा में धांधली के आरोप लगाकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई। दोनों मामलों को सुनते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने खुद ही इसे जनहित याचिका में बदल दिया और CBI से जांच का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट को ऐसी जांच का आदेश तभी देना चाहिए जब पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों और पहले पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिया गया हो। बेंच ने कहा, “केवल आरोप लगना पर्याप्त नहीं होता। CBI जांच का आदेश सामान्य रूप से नहीं दिया जा सकता, बल्कि बेहद असाधारण हालात में ही ऐसी आवश्यकता होती है।” अदालत ने यह भी जोड़ा, “भर्ती मामलों में तभी CBI जांच उचित है जब तथ्यों से ऐसा असामान्य चित्र उभरता है जो अदालत के विवेक को झकझोर दे।”

‘संदेह और अनुमान के आधार पर आदेश गलत’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कुछ “संदेह” और “अस्पष्ट तथ्यों” का हवाला दिया, पर यह स्पष्ट नहीं किया कि वे क्या हैं। इसके अलावा, किसी भी पक्ष ने CBI जांच की मांग नहीं की थी। इसलिए जांच का आदेश “कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करता”।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

बेंच ने कहा कि CBI जांच को “अंतिम उपाय (last resort)” के रूप में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए — केवल तब जब अदालत को लगे कि जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता खतरे में है। फैसले में कहा गया, “हाईकोर्ट के 18 सितंबर 2023 और 3 अक्टूबर 2023 के आदेश रद्द किए जाते हैं। अपीलों को मंजूरी दी जाती है।” सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच अपील की सुनवाई उसके मेरिट पर करे, और यह निर्णय चीफ जस्टिस के विवेक पर छोड़ा गया कि उसे किस रूप में पंजीकृत किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने भर्ती विवाद के मेरिट पर कोई राय नहीं दी है।

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