close up on hands of man and woman during a traditional wedding ceremony
Matrimonial Dispute: दिल्ली की अदालत का आदेश, कहा– महिला के पास संपत्ति का कोई स्वामित्व दस्तावेज नहीं; सिर्फ दावे किए, सबूत नहीं दिए।
बिक्री विलेख (sale deed) में पति का नाम दर्ज है
दिल्ली की एक अदालत ने एक महिला को अपने पति को उसकी संपत्ति का कब्जा लौटाने का निर्देश दिया है, जिसे उसने वैवाहिक विवाद के बाद घर से बाहर कर दिया था। अदालत ने कहा कि महिला यह साबित नहीं कर सकी कि संपत्ति पर उसका कोई स्वामित्व अधिकार है। जिला जज अंकुर जैन ने 29 अक्टूबर को यह आदेश जारी करते हुए कहा कि महिला के पास संपत्ति का कोई टाइटल डीड या स्वामित्व दस्तावेज नहीं है, जबकि बिक्री विलेख (sale deed) में पति का नाम दर्ज है। अदालत ने यह भी कहा कि महिला ने 2007 की उस बिक्री विलेख को कभी चुनौती भी नहीं दी।
महिला के दावे पर अदालत की टिप्पणी
महिला का कहना था कि संपत्ति उसकी शादी के समय माता-पिता और रिश्तेदारों से मिले पैसों से खरीदी गई थी। उसने यह भी दावा किया कि उसने अपने सोने के आभूषण बेचकर कई संपत्तियां खरीदी थीं, जिनमें यह संपत्ति भी शामिल है। लेकिन अदालत ने कहा कि महिला ने न तो इस संबंध में कोई दस्तावेज पेश किए, न ही यह बताया कि आभूषणों की बिक्री से कितनी राशि प्राप्त हुई, कितनी रकम पति को दी गई, और कितनी संपत्तियां खरीदी गईं। जज ने कहा, “प्रतिवादी (महिला) ने केवल खोखले आरोप लगाए हैं। कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया।”
कोर्ट का आदेश
अदालत ने कहा कि महिला का संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है और उसे तुरंत: पति को शांतिपूर्ण व खाली कब्जा सौंपना होगा, तथा संपत्ति पर किसी तीसरे पक्ष को अधिकार देने से रोका गया है। पति की ओर से एडवोकेट मनीष भदौरिया ने मामला दायर किया था, जिसमें कहा गया था कि पत्नी ने वैवाहिक मतभेद के चलते उसे संपत्ति से बाहर कर दिया।






