Law student: दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल को निर्देश दिया कि अटेंडेंस नियमों की दोबारा समीक्षा करें।
हाजिरी नियमों की फिर से समीक्षा करें
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि देश के किसी भी लॉ कॉलेज या विश्वविद्यालय को अब छात्रों को न्यूनतम उपस्थिति (minimum attendance) की कमी के कारण परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। साथ ही, अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया है कि वह कानूनी शिक्षा में अनिवार्य हाजिरी नियमों की पुनः समीक्षा करे।
सुषांत रोहिल्ला केस से जुड़ा है मामला
यह फैसला उस सुओ मोटू याचिका पर आया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में सुषांत रोहिल्ला आत्महत्या मामले के बाद शुरू किया था और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट को ट्रांसफर किया गया था। सुषांत, एमिटी लॉ स्कूल का तीसरे वर्ष का छात्र था, जिसने हाजिरी की कमी के चलते परीक्षा में बैठने से रोके जाने पर आत्महत्या कर ली थी।
“क्लास में सिर्फ मौजूद रहना पर्याप्त नहीं”
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और अमित शर्मा की खंडपीठ ने 122 पृष्ठों के अपने निर्णय में कहा, “कानूनी शिक्षा केवल रटने या एकतरफा पढ़ाई पर आधारित नहीं है। इसमें कानून की जानकारी, उसका व्यावहारिक प्रयोग और उसके कार्यान्वयन की समझ शामिल है। इसके लिए सिर्फ क्लास में मौजूद रहना न आवश्यक है, न पर्याप्त।”अदालत ने कहा कि लीगल एजुकेशन में मूट कोर्ट, सेमिनार, मॉडल पार्लियामेंट, लीगल एड और कोर्ट विजिट जैसी गतिविधियों को भी अटेंडेंस में शामिल किया जाना चाहिए।
हाजिरी की सख्ती से मानसिक दबाव और आत्महत्याओं का खतरा
कोर्ट ने माना कि छात्रों पर अनिवार्य उपस्थिति के दबाव से मानसिक तनाव और आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ी हैं। “कठोर उपस्थिति नियम शिक्षा में सुधार नहीं, बल्कि छात्रों की मानसिक स्थिति को कमजोर करते हैं।
संस्थानों को तुरंत लागू करने होंगे ये कदम
अदालत ने सभी BCI से मान्यता प्राप्त लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे तुरंत: छात्रों की साप्ताहिक अटेंडेंस ऑनलाइन पोर्टल या ऐप पर अपलोड करें,
मासिक रूप से अभिभावकों को सूचित करें अगर उपस्थिति कम है, अतिरिक्त कक्षाएं (ऑफलाइन या ऑनलाइन) संचालित करें उन छात्रों के लिए जिनकी हाजिरी कम है।
परीक्षा से नहीं रोक सकेंगे कॉलेज
अगर किसी छात्र की उपस्थिति सेमेस्टर के अंत में भी कम रहती है, तो भी “कॉलेज/विश्वविद्यालय उसे परीक्षा देने से नहीं रोक सकता।” हालांकि, फाइनल रिजल्ट में अधिकतम 5% अंक घटाए जा सकते हैं (या CGPA प्रणाली में 0.33 अंक तक)।
UGC और BCI को दिए गए निर्देश
UGC को अपने 2023 नियमों के तहत ग्रिवेंस रिड्रेसल कमेटियां (GRCs) बनाने के निर्देश दिए गए ताकि छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें सुनी जा सकें। BCI को निर्देश दिया गया कि वह 3-वर्षीय और 5-वर्षीय LLB कोर्स के लिए अटेंडेंस नियमों में लचीलापन लाए और त्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से व्यापक परामर्श करे। कोर्ट ने कहा कि सितंबर 2024 में जारी BCI का बायोमेट्रिक अटेंडेंस वाला सर्कुलर प्रभावी नहीं होगा।

