Monday, August 17, 2026
HomeLaworder HindiMitakshara Law : शादीशुदा बेटी को नहीं मिलेगा पिता की संपत्ति में...

Mitakshara Law : शादीशुदा बेटी को नहीं मिलेगा पिता की संपत्ति में हिस्सा…किस कानून के तहत जानें

Mitakshara Law : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा, यदि किसी हिंदू पिता की मृत्यु हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 लागू होने से पहले हुई है, तो उसकी संपत्ति शादीशुदा बेटी को नहीं मिलेगी।

रगमनिया बनाम जगमत मामले में सुनवाई

ऐसे मामलों में उत्तराधिकार का अधिकार मिताक्षरा कानून (Mitakshara Law) से तय होगा, जिसमें केवल पुत्र को ही पिता की संपत्ति पर अधिकार होता है। यह फैसला रगमनिया बनाम जगमत मामले में सुनाया गया, जिसमें बेटी रगमनिया ने अपने पिता सुधिनराम की संपत्ति में हिस्से का दावा किया था।

यह है मामला

रगमनिया ने अदालत में दावा किया कि गांव पुटपुटरा की पैतृक जमीन उनके पिता सुधिनराम और उनके भाई बुधाऊ के नाम पर दर्ज थी। सुधिनराम की मृत्यु 1950-51 में हो गई थी। उनके पुत्र बैकदास (प्रतिवादी जगमत के पिता) ने जमीन अपने नाम म्यूटेशन करा ली। रगमनिया ने जब इस बारे में 2002-03 में तहसीलदार अंबिकापुर के समक्ष आपत्ति दर्ज की, तो 23 अगस्त 2003 को उनका दावा खारिज कर दिया गया। इसके बाद रगमनिया ने सिविल कोर्ट में मामला दायर किया, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने कहा कि पिता की मृत्यु 1956 से पहले हुई थी, इसलिए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लागू नहीं होता। बेटी का संपत्ति पर अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने कहा कि “चूंकि सुधिनराम की मृत्यु 1950-51 में हुई थी, इसलिए उत्तराधिकार का अधिकार पुराने हिंदू कानून से तय होगा। उस समय बेटी को पिता की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं था, यदि पुत्र जीवित हो।”अदालत ने यह भी कहा कि रगमनिया ने कोई ऐसा सबूत नहीं दिया जिससे यह साबित हो कि वह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत दावा कर सकती हैं। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों — Arshnoor Singh v. Harpal Kaur (2020) और Arunachala Gounder v. Ponnusamy (2022) — का हवाला देते हुए कहा कि 1956 से पहले मृत्यु होने पर मिताक्षरा कानून ही लागू होगा।

यह दिया फैसला

हाईकोर्ट ने कहा, “जब कोई हिंदू पुरुष 1956 से पहले मरता है, तो उसकी संपत्ति पूरी तरह उसके पुत्र को मिलती है। बेटी को हिस्सा तभी मिलता है जब कोई पुरुष वारिस न हो।”इस तरह रगमनिया की अपील खारिज की गई। बैकदास द्वारा अपनी बेटी जगमत के नाम संपत्ति म्यूटेशन वैध माना गया। अदालत ने कहा कि यह संपत्ति “विभाजनीय (partible)” नहीं है।

कानूनी जानकारी: मिताक्षरा कानून क्या है

1956 से पहले, हिंदू परिवारों में संपत्ति के उत्तराधिकार पर मिताक्षरा स्कूल ऑफ लॉ (Mitakshara Law) लागू होता था। यह प्राचीन हिंदू विधि प्रणाली थी जो “पुत्र को पिता की संपत्ति का सह-अधिकार” (coparcenary right) देती थी।

मिताक्षरा कानून के प्रमुख नियम

  • पिता की मृत्यु से पहले ही पुत्र का अधिकार बन जाता था — यानी पुत्र को जन्म के साथ ही संपत्ति में हिस्सा मिलता था।
  • बेटियों को कोई अधिकार नहीं था, वे केवल “भोजन और भरण-पोषण” की पात्र मानी जाती थीं।
  • यदि परिवार में केवल पुत्र हों तो वही संपत्ति के पूर्ण उत्तराधिकारी होते थे।
  • यदि पुत्र न हो, तभी बेटी को सीमित अधिकार मिल सकता था, लेकिन वह भी “विरासत के स्थायी अधिकार” (ownership) के रूप में नहीं।

कब बदला कानून

1956 में जब हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) लागू हुआ, तब पहली बार बेटियों को “कानूनी उत्तराधिकारी” का दर्जा मिला। बाद में 2005 के संशोधन में बेटियों को “समान सह-अधिकार” (equal coparcenary right) दिया गया यानी अब बेटियां भी पिता की संपत्ति में पुत्रों के बराबर हिस्सेदार हैं, चाहे विवाह हो चुका हो या नहीं। यदि पिता की मृत्यु 1956 से पहले हुई हो, तो पुराना मिताक्षरा कानून लागू रहेगा और बेटी को हिस्सा नहीं मिलेगा। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में बेटी रगमनिया के दावे को खारिज किया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
moderate rain
29 ° C
29 °
29 °
89 %
2.6kmh
100 %
Mon
32 °
Tue
32 °
Wed
34 °
Thu
35 °
Fri
35 °