Supreme-Court
AI based Fraud: सुप्रीम कोर्ट में एआई के दुरुपयोग का चिंताजनक मामला सामने आया है।
‘दीपक रहेजा बनाम ओमकारा असेट रीकंस्ट्रकशन’ केस पर सुनवाई
दरअसल, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस आगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच में ‘दीपक रहेजा बनाम ओमकारा असेट रीकंस्ट्रकशन’ केस चल रहा है। ओमकारा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कहा, बेंगलुरु के ग्स्टाड होटल के प्रमोटर दीपक रहेजा ने लिखित दलील में सौ से अधिक ऐसे मुकदमों का हवाला दिया जो वास्तव में हैं ही नहीं। इसकी गंभीरता देखने के बाद कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं।
आरोप: काल्पनिक फैसले एआई से तैयार किए गए प्रतीत होते हैं
अधिवक्ता नीरज किशन कौल के मुताबिक, ये काल्पनिक फैसले एआई से तैयार किए गए प्रतीत होते हैं। रहेजा के जवाब में कई स्थानों पर आपराधिक मुकदमों को दिवाला संबंधी नजीर की तरह पेश किया गया है। कई गलत तथ्य दिए गए हैं और कुछ फैसलों को बार-बार अलग-अलग तर्कों के समर्थन में दिखाया गया, जबकि मूल निर्णय में ऐसा कुछ नहीं था।’ इस पर पीठ ने मौखिक रूप से कहा, ‘यदि ये संदर्भ झूठे या बनावटी पाए गए तो अपील कर्ता की जिम्मेदारी तय होगी। अदालत यह जांच करेगी कि दलीलों में पेश किए गए मुकदमे वास्तविक थे या एआई से बनाए गए।
यह है मामला
गौरतलब है कि आठ जुलाई को मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण ने ओमकारा द्वारा ग्स्टाड होटल के खिलाफ दायर दिवाला याचिकाएं स्वीकार कर ली थीं। अगस्त में अधिकरण ने आदेश कायम रखा और ग्स्टाड होटल तथा नियो कैप्रिकॉन प्लाजा- दोनों के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया जारी रखने का आदेश दिया। इसके बाद होटल के प्रमोटरों ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की।






