Wednesday, August 5, 2026
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Free-hands approach: डिजिटल अरेस्ट घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- CBI आपको ‘फ्री-हैंड्स’ हैं, जांच करें

Free-hands approach: देशभर में साइबर अपराधियों द्वारा किए जा रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वत: संज्ञान लिया।

बिना FIR के भी फ्रीज करें साइबर अपराध से जुड़े खाते

शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए कड़े निर्देश जारी किए। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत की अगुआई वाली पीठ ने कहा कि CBI को इन मामलों में पहली और स्वतंत्र जांच तुरंत शुरू करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CBI को यह अधिकार होगा कि वह साइबर अपराध से जुड़े बैंक खातों को बिना FIR के भी फ्रीज कर सकती है। “डिजिटल अरेस्ट स्कैम देश की शीर्ष जांच एजेंसी के तत्काल हस्तक्षेप की मांग करता है। इसलिए CBI को प्राथमिक जांच की जिम्मेदारी दी जाती है।

CBI को मिली पूरी स्वतंत्रता

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि CBI को उन बैंकरों की भूमिका की जांच में पूर्ण स्वतंत्रता होगी, जिनके माध्यम से ऐसे खातों का संचालन हुआ। RBI को भी पक्षकार बनाया गया है और कोर्ट ने उससे पूछा है कि संदिग्ध खातों की पहचान और अपराध की रकम फ्रीज करने के लिए AI/ML सिस्टम कब लागू किए जा सकते हैं। IT नियम, 2021 के तहत आने वाले सभी इंटरमीडियरी CBI को पूरी सहयोग देंगे। जिन राज्यों ने अभी तक CBI को सामान्य सहमति नहीं दी है, उन्हें IT Act के तहत जांच के लिए अनुमति देने का निर्देश दिया गया है, ताकि देशभर में एकीकृत कार्रवाई की जा सके। मामलों की सीमा-पार प्रकृति को देखते हुए CBI जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद भी ले सकती है।

टेलीकॉम कंपनियों की लापरवाही पर भी फटकार

कोर्ट ने कहा कि उसके सामने रखे गए रिकॉर्ड इस बात की ओर इशारा करते हैं कि कई टेलीकॉम कंपनियों ने लापरवाही बरती है—जैसे एक ही नाम पर कई SIM कार्ड जारी करना। कोर्ट ने दूरसंचार विभाग से SIM के दुरुपयोग को रोकने के उपायों पर विस्तृत प्रस्ताव मांगा है।

राज्यों को साइबर क्राइम सेंटर बनाने का आदेश

अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे जितनी जल्दी हो सके राज्य स्तरीय साइबर क्राइम सेंटर स्थापित करें। साथ ही IT नियमों के तहत सभी प्राधिकरणों को यह सुनिश्चित करना होगा कि साइबर अपराध से जुड़े सभी मोबाइल फोनों का डेटा संरक्षित रखा जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ये स्वत: संज्ञान कार्यवाही केवल डिजिटल-अरेस्ट स्कैम पर केंद्रित है। अन्य साइबर अपराध श्रेणियों पर निगरानी से जुड़े निर्णय बाद में लिए जाएंगे। अदालत ने कहा, “सॉलिसिटर जनरल सुनिश्चित करें कि गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और वित्त मंत्रालय अदालत के समक्ष अपने व्यापक सुझाव और विचार रखें, ताकि प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।”

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