Supreme Court View
LAWYER-RUCKUS: सुप्रीम कोर्ट में 3 दिसंबर 2025 को हाई ड्रामा देखने को मिला, जब एक महिला वकील को मुख्य न्यायाधीश (CJI) की कोर्ट से सुरक्षाकर्मियों द्वारा बाहर ले जाया गया।
महिला वकील ने मामले को बार-बार उठाने की कोशिश की
वकील ने सूचीबद्ध न होने वाले एक मामले को बार-बार उठाने की कोशिश की, और पीठ के मना करने के बावजूद हंगामा जारी रखा। यह घटना तब हुई जब महिला वकील ने CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां तथा न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ के सामने मौखिक रूप से एक ऐसा मामला उठाया जो उस दिन की लिस्ट में शामिल नहीं था।
क्या था वकील का आरोप?
महिला वकील ने आरोप लगाया कि जब वह मुंबई में थीं, तब दिल्ली के एक गेस्ट हाउस में उनकी एक करीबी दोस्त की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने दावा किया कि जिस पुलिस अधिकारी ने शुरू में FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया था, उसे ही अब मामले में जांच अधिकारी (IO) नियुक्त कर दिया गया है।
यूं रहा सुप्रीम कोर्ट रूम का माहौल
- CJI की सलाह: CJI ने उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और एक नियमित याचिका दायर करने की सलाह दी।
- वकील का जवाब: वकील ने दलील दी, “मैं डिप्रेशन में हूँ, मैं वह (याचिका) करूँगी,” लेकिन उन्होंने कोर्ट छोड़ने से इनकार कर दिया।
- हस्तक्षेप: जब अगले मामले को पुकारा गया, तब भी महिला वकील अपनी बात पर अड़ी रहीं। पीठ ने वहाँ मौजूद एक अन्य वकील से उनकी याचिका दाखिल करने में मदद करने के लिए भी कहा।
- हंगामा: जब महिला कोर्ट मार्शल ने उन्हें हटाने की कोशिश की, तो स्थिति और बिगड़ गई। वकील ने चिल्लाते हुए कहा, “दुर्व्यवहार मत करो, मुझे मत छुओ।”
- बाहर निकाला: न्यायमूर्ति भुइयां के हस्तक्षेप और एक साथी वकील की न्यायालय की गरिमा बनाए रखने की सलाह के बावजूद, महिला वकील सुरक्षा को लेकर “यह बात इस अदालत के कानों तक पहुंचाना” चाहती थीं। जब उन्होंने आवाज ऊंची करना जारी रखा तो कोर्ट की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग को कुछ देर के लिए म्यूट कर दिया गया, और अंततः उन्हें कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया गया।
- यह घटना अदालत की कार्यवाही में अनुशासन बनाए रखने की चुनौती को दर्शाती है।
सुप्रीम कोर्ट में मामलों को उठाने (Mentioning) के नियम
भारतीय सुप्रीम कोर्ट में मामलों को उठाने (Mentioning) का अर्थ है किसी वकील द्वारा अदालत के समक्ष किसी मामले का उल्लेख करना, आमतौर पर तत्काल सुनवाई या किसी प्रशासनिक अनुरोध के लिए। यह प्रक्रिया बेहद औपचारिक और सख्त नियमों द्वारा शासित होती है ताकि अदालत के समय का सदुपयोग हो सके।
- सूचीबद्ध मामले (Listed Cases)ये वे मामले होते हैं जो उस विशेष दिन की ‘कारण सूची’ (Cause List) में शामिल होते हैं।
पहलू विवरण
प्रक्रिया सूचीबद्ध मामले तय समय पर, क्रम के अनुसार स्वयं ही कोर्ट द्वारा पुकारे जाते हैं।
वकील की भूमिका वकील केवल तब बोलते हैं जब उनका मामला पुकारा जाता है, और उन्हें केवल मामले के गुण-दोष पर दलीलें पेश करनी होती हैं।
उठाने का समय कोई विशेष ‘उल्लेख’ (Mention) आवश्यक नहीं होता, क्योंकि मामला सूची में होता है।
- गैर-सूचीबद्ध मामले (Unlisted Cases) / तत्काल उल्लेख (Urgent Mentioning)
ये वे मामले होते हैं जो उस दिन की कारण सूची में शामिल नहीं होते हैं, लेकिन जिनकी तत्काल सुनवाई आवश्यक होती है (जैसे मृत्युदंड, बेदखली, या अपूरणीय क्षति से संबंधित मामले)।
पहलू विवरण
प्रक्रिया वकील को मामले को मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष मौखिक रूप से उठाने की अनुमति लेनी होती है।
उठाने पर प्रतिबंध यदि CJI या पीठ उल्लेख करने से मना कर देती है या वकील को उचित याचिका/आवेदन दाखिल करने की सलाह देती है, तो वकील को तुरंत रुक जाना और कोर्ट की गरिमा बनाए रखते हुए बाहर चले जाना आवश्यक होता है।
हंगामे पर कार्रवाई यदि कोई वकील मना करने के बावजूद उल्लेख करता रहता है, तो इसे न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) और कोर्ट की गरिमा भंग करने वाला आचरण माना जाता है, जैसा कि आपने पिछली खबर में देखा।
नियम a. समय: उल्लेख (Mentioning) केवल सुबह 10:30 बजे कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले किया जा सकता है। यह समय सख्ती से सीमित होता है, आमतौर पर केवल कुछ मिनट।
नियम b. अनुमति: वकील को पहले “रजिस्ट्रार” के पास एक ‘उल्लेख पर्ची’ (Mentioning Slip) दाखिल करनी होती है, जिसमें मामले की तत्काल प्रकृति का कारण बताया जाता है।
नियम c. CJI की मंजूरी: CJI ही एकमात्र प्राधिकारी होते हैं जो किसी गैर-सूचीबद्ध मामले को सुनने की अनुमति देते हैं। वह केवल अत्यंत आवश्यक या अत्यावश्यक मामलों को ही स्वीकार करते हैं।





