shallow photography of USA flag
LAWSUIT TRANSGENDER: डोनाल्ड ट्रंप के पद संभालते ही जारी किए गए ‘इम्यूटेबल जेंडर’ (अपरिवर्तनीय लिंग) के आदेश के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है।
नागरिक अधिकारों का उल्लंघन: ट्रांसजेंडर डेटा साइंटिस्ट
नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (NSA) की एक ट्रांसजेंडर डेटा साइंटिस्ट, सारा ओ’नील ने प्रशासन पर मुकदमा करने का फैसला किया है। सारा का आरोप है कि राष्ट्रपति का कार्यकारी आदेश उनके नागरिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
क्या है विवाद: ट्रंप के उस आदेश में क्या है?
पदभार संभालते ही ट्रंप ने एक आदेश जारी किया था, जिसके मुताबिक:
- सिर्फ दो लिंग: अमेरिकी सरकार के सभी कामकाज और दस्तावेजों में केवल दो ही लिंग (स्त्री और पुरुष) मान्य होंगे।
- अपरिवर्तनीय जेंडर: सरकार का तर्क है कि जन्म के समय जो लिंग है, वही रहेगा (Immutable Sex)। इसे बदला नहीं जा सकता।
NSA कर्मचारी सारा के आरोप: “मुझसे मेरे हक छीने गए”
सारा ओ’नील का दावा है कि इस आदेश के बाद NSA में उनके साथ भेदभाव शुरू हो गया है:
- प्रोनाउन पर रोक: ऑफिस के लिखित ईमेल या मैसेज में सारा खुद को ‘Female’ या महिला प्रोनाउन (She/Her) से संबोधित नहीं कर सकतीं।
- बाथरूम बैन: उन्हें ऑफिस में महिलाओं के टॉयलेट का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है।
- अस्तित्व पर खतरा: मुकदमे में कहा गया है कि ट्रंप का आदेश सारा के ‘अस्तित्व’ को ही नकारता है।
“ट्रंप सरकार का यह आदेश ‘जेंडर विचारधारा’ के नाम पर सच्चाई को खारिज कर रहा है। यह सीधे तौर पर भेदभाव है।” — सारा ओ’नील के वकील
सुप्रीम कोर्ट का 2020 का वो फैसला: सरकार की मुश्किल बढ़ेगी?
सारा के वकीलों ने 2020 के सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि:
- सेक्शन VII के तहत लिंग के आधार पर भेदभाव की मनाही है।
- कोर्ट ने माना था कि ट्रांसजेंडर स्टेटस के आधार पर भेदभाव करना असल में ‘सेक्स’ (लिंग) के आधार पर ही भेदभाव करने जैसा है।
हर्जाने की मांग: ‘वर्कप्लेस’ का माहौल खराब हुआ
सारा का तर्क है कि सरकार के इन आदेशों ने ऑफिस में ‘हॉस्टाइल वर्क एनवायरमेंट’ (तनावपूर्ण माहौल) बना दिया है। वे अपनी सुरक्षा और अधिकारों की बहाली के साथ-साथ वित्तीय हर्जाने की मांग भी कर रही हैं।
एक्शन में ट्रंप: पहले ही दिन से फैसलों की झड़ी
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत में ही ताबड़तोड़ फैसले लिए हैं। यह जेंडर विवाद उन्हीं चुनावी वादों का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने ‘जेंडर आइडियोलॉजी’ को खत्म करने की बात कही थी। फिलहाल व्हाइट हाउस ने इस संभावित मुकदमे पर कोई टिप्पणी नहीं की है।






