Friday, June 19, 2026
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Annual letter to the judiciary: अमेरिकी चीफ जस्टिस का देश के नाम संदेश…बोले- संविधान अडिग और अटूट है

Annual letter to the judiciary: अमेरिका के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने नए साल के मौके पर न्यायपालिका के नाम अपनी वार्षिक चिट्ठी जारी की है।

अमेरिका का संविधान एक ‘मजबूत स्तंभ’ की तरह खड़ा

देश में चल रहे राजनीतिक घमासान और सुप्रीम कोर्ट में लंबित बड़े फैसलों के बीच रॉबर्ट्स ने भरोसा दिलाया है कि अमेरिका का संविधान एक ‘मजबूत स्तंभ’ की तरह खड़ा है और यह पूरी तरह सुरक्षित है।

चिट्ठी का सार: राजनीति से ऊपर संविधान

चीफ जस्टिस ने थॉमस पेन के प्रसिद्ध पंपलेट ‘कॉमन सेंस’ (1776) का जिक्र करते हुए अपने पत्र की शुरुआत की। उन्होंने समापन करते हुए कहा कि दलीय राजनीति (Partisan Politics) के इस शोर-शराबे के बीच हमें शांति और समाधान के लिए संविधान और स्वतंत्रता के घोषणापत्र की ओर ही देखना चाहिए। चीफ जस्टिस ने पूर्व राष्ट्रपति केल्विन कूलिज के 100 साल पुराने शब्दों को दोहराते हुए लिखा— “देश के बुनियादी दस्तावेज (संविधान) दृढ़ और अडिग हैं। यह तब भी सच था और आज भी सच है।”

ट्रंप सरकार और न्यायपालिका में तनाव का बैकग्राउंड

  • यह पत्र ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच ‘संवैधानिक संकट’ की बहस छिड़ी हुई है।
  • जज को हटाने की मांग: हाल ही में ट्रंप ने वेनेजुएला के प्रवासियों से जुड़े एक केस में अपने खिलाफ फैसला देने वाले जज को हटाने (इंपीचमेंट) की मांग की थी, जिस पर चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
  • इतिहास का हवाला: रॉबर्ट्स ने अपनी चिट्ठी में 19वीं सदी के एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि संसद केवल ‘विवादास्पद फैसलों’ के आधार पर जजों को उनके पद से नहीं हटा सकती।

2026 में सुप्रीम कोर्ट के सामने बड़ी चुनौतियां

  • आने वाले साल में सुप्रीम कोर्ट को कई ऐसे मामलों पर फैसला सुनाना है जो सीधे तौर पर ट्रंप सरकार की नीतियों से जुड़े हैं।
  • बर्थराइट सिटीजनशिप: क्या ट्रंप अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को खत्म कर सकते हैं?
  • टैरिफ पावर: क्या राष्ट्रपति अपनी मर्जी से सैकड़ों देशों पर आयात शुल्क (Tariff) लगा सकते हैं?
  • सैन्य और आव्रजन: ट्रांसजेंडर लोगों के सेना में शामिल होने पर रोक और बॉर्डर फंडिंग जैसे मामलों पर भी अंतिम मुहर लगनी बाकी है।
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