Supreme Court India
EMPLOYEES CORRUPTION: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राज्य की पुलिस (जैसे ACB) केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों में जांच कर सकती है और चार्जशीट भी दाखिल कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख बातें
- जांच का अधिकार: जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17 किसी राज्य एजेंसी या विशेष एजेंसी को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ जांच करने से नहीं रोकती। बस शर्त यह है कि जांच अधिकारी एक निश्चित रैंक का होना चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि इसके लिए CBI से किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
- कार्य का विभाजन मात्र एक सुविधा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आमतौर पर केंद्र के मामलों की जांच CBI और राज्य के मामलों की जांच एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपी जाती है, लेकिन यह केवल “सुविधा और काम के दोहराव से बचने” के लिए है, न कि किसी कानूनी पाबंदी के कारण।
- संज्ञेय अपराध (Cognisable Offence): चूंकि भ्रष्टाचार के अपराध संज्ञेय (गंभीर) श्रेणी में आते हैं, इसलिए राज्य पुलिस को उन पर कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
किस मामले में आया यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एक केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। आरोपी का तर्क था कि चूंकि वह केंद्र सरकार का कर्मचारी है, इसलिए केवल CBI ही उसके खिलाफ जांच कर सकती है। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है।
इस फैसले का असर
- त्वरित कार्रवाई: अब केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के मामलों में स्थानीय पुलिस या राज्य की ACB तुरंत एक्शन ले सकेगी, उन्हें CBI के हस्तक्षेप का इंतजार नहीं करना होगा।
- भ्रष्टाचार पर लगाम: जांच एजेंसियों के बीच क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) को लेकर होने वाले भ्रम को कोर्ट ने खत्म कर दिया है, जिससे भ्रष्ट अधिकारियों के लिए कानूनी दांवपेच का सहारा लेना मुश्किल होगा।






