Friday, October 9, 2026
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FIR INCONSISTENCIES: बहराइच के SP से बोला कोर्ट…आपके FIR में कई विसंगतियां, सुबह 10:45 बजे भोर कैसे हो सकती है

FIR INCONSISTENCIES: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बहराइच के पुलिस अधीक्षक (SP) से गोहत्या मामले की FIR में विसंगतियों पर स्पष्टीकरण मांगा है।

काल्पनिक और अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई FIR

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बहराइच जिले के पुलिस अधीक्षक को गोहत्या के एक मामले में दर्ज FIR में “विसंगतियों” को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि अदालतें हस्तक्षेप करें और अधिकारियों द्वारा दर्ज की जाने वाली काल्पनिक और अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई FIR पर रोक लगाएं।

याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करें

याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए, न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति पी.के. श्रीवास्तव की लखनऊ पीठ ने कहा कि यदि पुलिस अधीक्षक (SP) ने अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल नहीं किया, तो उन्हें मामले के पूरे रिकॉर्ड के साथ अदालत में पेश होना होगा। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की है। अदालत ने यह आदेश 16 फरवरी को अकबर अली द्वारा दायर एक रिट याचिका पर दिया, जिन्होंने 22 जनवरी को बहराइच के जरवल रोड थाने में दर्ज FIR को चुनौती दी थी। एक सूचना के आधार पर, पुलिस दल ने गोहत्या और हत्या के प्रयास के आरोप में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। जहाँ तीन लोग मौके पर ही दबोच लिए गए थे, वहीं चौथा घटनास्थल से फरार हो गया था। बाद में, इन लोगों ने अपराध में अली का नाम भी लिया था।

FIR में मुख्य विसंगतियां

  • FIR में उल्लेख था कि घटना सुबह 10:45 बजे हुई थी। जब पुलिस दल मौके पर पहुँचा, तो अली और अन्य को यह कहते सुना गया कि उन्हें भाग जाना चाहिए क्योंकि “भोर (सुबह) होने वाली है।”पीठ इस बात पर हैरान थी कि सुबह 10:45 बजे भोर कैसे हो सकती है।
  • अदालत ने FIR में दर्ज कुछ नियमित टिप्पणियों पर भी ध्यान दिया और कहा कि ये किसी “फिल्मी पटकथा” (मूवी स्क्रिप्ट) जैसी लगती हैं।

अदालत की सख्त टिप्पणी

इस मामले में FIR दर्ज करने के तरीके पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा, समय-समय पर इस अदालत ने यह रेखांकित किया है कि FIR में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा जमीनी हकीकत को नहीं दर्शाती है, बल्कि यह सुनी-सुनाई, पहले से लिखी हुई और फिल्मों की पटकथा से भारी रूप से प्रेरित, काल्पनिक और बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई लगती है। पीठ ने आगे कहा, अब समय आ गया है कि अदालतें हस्तक्षेप करें और अधिकारियों द्वारा दर्ज की जा रही ऐसी काल्पनिक और अतिरंजित FIR पर रोक लगाएं, जिसका वर्तमान मामला एक ज्वलंत उदाहरण है।

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