TARIFFS INDIAN-LAWYER: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी ग्लोबल टैरिफ (Global Tariffs) के खिलाफ आए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में एक भारतीय नाम चमक रहा है नील कात्याल।
भारतीय प्रवासियों के बेटे और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल रहे कात्याल ने छोटे व्यवसायों की ओर से इस मामले की पैरवी की और जीत हासिल की। आए फैसले के तुरंत बाद कात्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बस एक शब्द लिखा— “विजय” (Victory)।
“राष्ट्रपति शक्तिशाली हैं, लेकिन संविधान सबसे ऊपर”
फैसले के बाद एक इंटरव्यू में नील कात्याल ने भावुक होते हुए कहा, यह अमेरिकी व्यवस्था की खूबसूरती है। एक प्रवासियों का बेटा अदालत में जाकर दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के खिलाफ यह कह सका कि—’राष्ट्रपति अवैध काम कर रहे हैं।’ अंत में जजों ने वोट दिया और हम जीत गए। यह संदेश साफ है: अमेरिका में सिर्फ कांग्रेस (संसद) ही लोगों पर टैक्स लगा सकती है, राष्ट्रपति नहीं।”
पिता को किया याद: कड़े (Kada) के साथ शेयर की थी फोटो
नवंबर 2025 में इस केस की सुनवाई से पहले नील कात्याल ने एक दिल छू लेने वाली फोटो पोस्ट की थी। इसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कानूनी दस्तावेजों (Brief) के ऊपर अपने पिता का परंपरागत भारतीय ‘कड़ा’ रखा था। उन्होंने लिखा था “सबसे पहले अपने पिता के बारे में सोच रहा हूं, जो आजादी की इस धरती पर आए थे। संविधान की जीत हो।”
नील कात्याल का शानदार सफर: शिकागो से सुप्रीम कोर्ट तक
- जन्म: 1970 में शिकागो में। उनकी मां पीडियाट्रिशियन और पिता इंजीनियर थे, जो भारत से अमेरिका जाकर बसे थे।
- शिक्षा: येल लॉ स्कूल (Yale Law School) से स्नातक।
- अनुभव: उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अब तक 54 मामलों में दलीलें दी हैं।
- सम्मान: उन्हें 2011 में अमेरिकी न्याय विभाग के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘एडमंड रैंडोल्फ अवार्ड’ से नवाजा गया था।
- प्रोफेसर: वे जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में सबसे कम उम्र के प्रोफेसरों में से एक रहे और हार्वर्ड व येल में विजिटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं।
यह था मामला
राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर कई उत्पादों पर भारी टैरिफ (लेवी) लगाने का फैसला किया था। कात्याल ने तर्क दिया कि यह कदम असंवैधानिक है क्योंकि कर लगाने का अधिकार केवल निर्वाचित संसद (Congress) के पास है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए ट्रंप के इस फैसले को रद्द कर दिया।
न्याय के लिए एक बड़ी जीत
कात्याल ने ‘लिबर्टी जस्टिस सेंटर’ के नेतृत्व की भी सराहना की, जिन्होंने इस लड़ाई को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि यह केस किसी एक राष्ट्रपति के खिलाफ नहीं, बल्कि शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) और हमारे लोकतंत्र के बुनियादी मूल्यों को बचाने के बारे में था।

