Saturday, September 19, 2026
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Unnao Case: 3 पुलिस अफसरों के बारे में कोर्ट ने कहा- CM पोर्टल की शिकायत FIR के बराबर नहीं, पढ़ें

Unnao Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्नाव रेप कांड से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उत्तर प्रदेश के तीन पुलिस अधिकारियों को बरी कर दिया है।

इन अधिकारियों पर पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ FIR दर्ज करने में देरी और कोताही बरतने के आरोप थे। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि भले ही बाद में मुख्य आरोपी (सेंगर) को दोषी ठहराया गया हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उस समय पुलिस अधिकारियों ने अपनी ड्यूटी में जानबूझकर लापरवाही की थी।

क्या था मामला?

CBI ने तत्कालीन सर्किल ऑफिसर कुंवर बहादुर सिंह, SHO धर्म प्रकाश शुक्ला और सब-इंस्पेक्टर दिग्विजय सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि 2017 में रेप की जानकारी मिलने के बावजूद इन अधिकारियों ने FIR दर्ज नहीं की, जो IPC की धारा 166A (लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना) के तहत अपराध है।

कोर्ट के फैसले की 3 बड़ी बातें

  • CM पोर्टल vs FIR: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज करना CrPC की धारा 154 के तहत पुलिस स्टेशन में दी गई जानकारी के समान नहीं है।
  • सीधा संवाद ज़रूरी: जज मयंक गोयल ने कहा कि FIR दर्ज करने की वैधानिक जिम्मेदारी तब शुरू होती है जब संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की सूचना सीधे पुलिस अधिकारी को दी जाए।
    -पीड़िता का बयान: क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान पीड़िता ने स्वीकार किया कि पोर्टल पर शिकायत करने से पहले उसने सीधे पुलिस स्टेशन में कोई शिकायत नहीं दी थी।

अदालत की टिप्पणी: IPC की धारा 166A

IPC की धारा 166A एक दंडात्मक धारा है और इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। जब तक यह साबित न हो जाए कि पुलिस अधिकारी को सीधे सूचना दी गई थी और उसने जानबूझकर इसे रिकॉर्ड नहीं किया, तब तक उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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