PM MORPHED VIDEO: दिल्ली की एक अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ किया गया) वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दे दी है।
अदालत ने कहा कि आरोपी जमानत के ट्रिपल टेस्ट (फरार होने का जोखिम, सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करना) की शर्तों को पूरा करता है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर ने आरोपी विनोद तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। तिवारी 14 मार्च से जेल में बंद था।
क्या था मामला?
- शिकायत: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मोहम्मद अब्दुल्ला नामक व्यक्ति की शिकायत पर FIR दर्ज की थी।
- आरोप: आरोप था कि विनोद तिवारी के फेसबुक अकाउंट से प्रधानमंत्री का एक AI-जनरेटेड और मॉर्फ्ड वीडियो शेयर किया गया था, जिसमें पीएम को “अपमानजनक टिप्पणी” करते हुए दिखाया गया था। पुलिस के अनुसार, इस वीडियो में सार्वजनिक व्यवस्था और सद्भाव बिगाड़ने की क्षमता थी।
- कार्रवाई: पुलिस ने वह मोबाइल फोन जब्त कर लिया है जिससे यह गतिविधि की गई थी।
अदालत का फैसला और ‘ट्रिपल टेस्ट’
- साक्ष्य की स्थिति: इलेक्ट्रॉनिक सबूत (मोबाइल) पहले ही जब्त किए जा चुके हैं, इसलिए सबूतों से छेड़छाड़ की गुंजाइश कम है।
- सजा का प्रावधान: आरोपी पर जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सजा तीन साल तक की है।
- सिद्धांत: कोर्ट ने दोहराया कि कानून का स्थापित सिद्धांत है—”जेल अपवाद है और जमानत नियम” (Bail is the rule and jail is the exception)।
- कस्टडी की जरूरत नहीं: जांच जारी है, लेकिन इस स्तर पर आरोपी को हिरासत में रखकर पूछताछ करने की और आवश्यकता नहीं दिखती।
जमानत की कड़ी शर्तें
राहत देने के साथ ही कोर्ट ने आरोपी पर कई सख्त शर्तें लगाई हैं। इसमें वह बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ेगा। जांच में सहयोग करेगा और बुलाए जाने पर पेश होगा। सबूतों या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा। मुकदमे के दौरान ऐसी किसी भी गतिविधि में दोबारा शामिल नहीं होगा। अपना मोबाइल नंबर हमेशा चालू रखेगा और पुलिस को उपलब्ध कराएगा।

