Monday, September 21, 2026
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MATERNITY ADOPTION: अब बच्चे की उम्र चाहे जो हो, मिलेगी मैटरनिटी लीव…पुरानी शर्तें पर सुप्रीम रोक

MATERNITY ADOPTION:सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उस कानून को रद्द कर दिया है, जो केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को ही मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) का पात्र मानता था।

जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। 100 पन्नों के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ने इसे भेदभावपूर्ण करार देते हुए कहा कि गोद लेना ‘प्रजनन स्वायत्तता’ (Reproductive Autonomy) के अधिकार का हिस्सा है।

अदालत की मुख्य टिप्पणियां: “मातृत्व एक जिम्मेदारी है, सिर्फ प्रक्रिया नहीं”

  • अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन: कोर्ट ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 की धारा 60(4) के तहत आयु-आधारित वर्गीकरण असंवैधानिक है।
  • उद्देश्य: “मातृत्व लाभ का उद्देश्य केवल बच्चे के जन्म की प्रक्रिया से नहीं, बल्कि मातृत्व (Motherhood) की प्रक्रिया से जुड़ा है। गोद लेने का तरीका चाहे जो हो, मां की जिम्मेदारियां नहीं बदलतीं।”
  • भावनात्मक तालमेल: कोर्ट ने माना कि बच्चा चाहे 3 महीने का हो या उससे बड़ा, उसे नए परिवार में घुलने-मिलने के लिए मां के साथ और समय की जरूरत होती है। विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों या सिंगल मदर्स के मामले में यह और भी महत्वपूर्ण है।

केंद्र को निर्देश: ‘पैटर्निटी लीव’ पर भी विचार करें

  • सुप्रीम कोर्ट ने न केवल महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया, बल्कि केंद्र सरकार से एक और महत्वपूर्ण मांग की।
  • “केंद्र सरकार को ‘पैटर्निटी लीव’ (Paternity Leave – पिता के लिए अवकाश) को भी एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने के लिए प्रावधान लाना चाहिए।”

मामले की पृष्ठभूमि: एक मां की कानूनी लड़ाई

  • यह फैसला अधिवक्ता हंसानंदिनी नंदूरी की याचिका पर आया है। खुद दो बच्चों की गोद लेने वाली मां होने के नाते उन्होंने इस कानून को चुनौती दी थी।
  • दलील: जैविक माताओं को 26 सप्ताह की छुट्टी मिलती है, जबकि गोद लेने वाली माताओं को केवल 12 सप्ताह और वह भी तब, जब बच्चा 3 महीने से छोटा हो। यह “लिप सर्विस” के समान है और समानता के अधिकार के खिलाफ है।

फैसले का महत्व: “बुनियादी मानवाधिकार”

  • समान अधिकार: गोद लेने वाली मां के अधिकार और कर्तव्य वही हैं जो एक जैविक मां के होते हैं।
  • कार्यस्थल पर समानता: मातृत्व अवकाश एक बुनियादी मानवाधिकार है जो कार्यस्थल पर समानता को बढ़ावा देता है और मां-बच्चे के स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
  • आर्थिक स्वतंत्रता: यह कानून महिलाओं को उनकी आर्थिक स्वतंत्रता सुरक्षित रखते हुए अपनी माता-पिता की जिम्मेदारियों को निभाने में मदद करता है।

अब क्या बदलेगा?

इस फैसले के बाद अब कोई भी कामकाजी महिला (निजी या सरकारी क्षेत्र), जो कानूनी रूप से किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेती है, वह 12 सप्ताह के वैतनिक मातृत्व अवकाश (Paid Leave) की हकदार होगी।

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