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Child Marriage: 18 साल से कम उम्र की लड़की की शादी कराना गैरकानूनी…यह बोर्ड कहां लगाना अनिवार्य है

Child Marriage: कर्नाटक हाई कोर्ट का सख्त रुख; कहा- “शादी के हर वेन्यू पर लगाएं कानूनी चेतावनी का बोर्ड” अवश्य लगाया जाए।

बाल विवाह (Child Marriage) के खिलाफ एक कड़ा संदेश देते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 18 साल से कम उम्र की लड़की की शादी कराना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि इसमें शामिल हर व्यक्ति चाहे वो माता-पिता हों, मंदिर के पुजारी हों या मैरिज हॉल के मालिक सब पर कानूनी गाज गिर सकती है।

कोर्ट के बड़े निर्देश: अब क्या बदलेगा?

-Venue पर डिस्प्ले बोर्ड: कोर्ट ने ‘बाल विकास परियोजना अधिकारियों’ (CDPO) को निर्देश दिया है कि हर मंदिर, मैरिज हॉल और शादी वाले स्थानों पर अनिवार्य रूप से नोटिस बोर्ड लगाए जाएं।

  • चेतावनी: इन बोर्ड्स पर साफ लिखा होना चाहिए कि 18 साल से कम उम्र में शादी करना कानूनन अपराध है और इसके गंभीर आपराधिक परिणाम (Criminal Consequences) होंगे।
  • पुजारी और मैनेजमेंट भी जिम्मेदार: जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि अगर किसी मंदिर या हॉल में बाल विवाह होता है, तो वहां का मैनेजमेंट और शादी कराने वाला पुजारी भी Prohibition of Child Marriage Act, 2006 के दायरे में आएंगे। वे अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

मामला क्या था?

अदालत एक 27 साल के युवक और 16 साल की नाबालिग लड़की के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। माता-पिता ने अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।

अदालत की ‘पावरफुल’ टिप्पणियां

  • “बचपन का समर्पण है ऐसी शादी”: कोर्ट ने कहा कि अक्सर माता-पिता ‘सामाजिक परंपरा’ का हवाला देकर नाबालिग लड़कियों की शादी कर देते हैं। जिसे वे ‘पारिवारिक सहमति’ कहते हैं, वह असल में बचपन का सरेंडर है।
  • शिक्षा का अंत: कोर्ट ने दुख जताया कि 18 से पहले शादी होने पर लड़की का स्कूल छूटना तय है और उसके प्रोफेशनल सपने सिर्फ सपने बनकर रह जाते हैं।
  • मीडिया की भूमिका: कोर्ट ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से भी समाज को इस मुद्दे पर जागरूक करने की अपील की।
  • सहमति से अपराध खत्म नहीं होता: कोर्ट ने साफ कहा कि भले ही जोड़ा अभी खुशी-खुशी रह रहा हो, लेकिन शादी के समय जो गैर-कानूनी काम हुआ है, उसे मिटाया नहीं जा सकता।

Prohibition of Child Marriage Act (PCMA), 2006

  • लड़की की उम्र: कम से कम 18 वर्ष।
  • लड़के की उम्र: कम से कम 21 वर्ष।
  • सजा: बाल विवाह कराने, उसे बढ़ावा देने या रोकने में विफल रहने वालों को कठोर कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है।

IN THE HIGH COURT OF KARNATAKA AT BENGALURU
DATED 10TH MARCH, 2026
THE HON’BLE MR. JUSTICE M.NAGAPRASANNA
CRIMINAL PETITION NO. 1605 OF 2026

  1. SRI MANJUNATHA N.,
    AGED ABOUT 31 YEARS,
    S/O NARAYANASWAMY
  2. SRI NARAYANASWAMY,
    AGED ABOUT 58 YEARS,
    S/O LATE MARIYAPPA
  3. SMT. GAYATHRAMMA @ GAYATHRI,
    AGED ABOUT 61 YEARS,
    W/O NARAYANASWAMY
  4. SRI MANJUNATHA.B.S,
    AGED ABOUT 47 YEARS,
    S/O LATE B.T. SRINIVAS
  5. SMT. MANJULA,
    AGED ABOUT 47 YEARS,
    W/O MANJUNATHA.B.S

Versus….THE STATE OF KARNATAKA,
THROUGH CHANNARAYAPATANA POLICE STATION
BENGALURU DISTRICT – 562 135.

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