Group B/C Employees: कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के तबादलों (Transfers) और तैनातियों (Postings) को लेकर एक बेहद सख्त और स्पष्ट आदेश जारी किया है।
कोर्ट ने कहा है कि ट्रांसफर से जुड़े मामले डिपार्टमेंट लेवल पर ही खत्म होने चाहिए और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को इसमें सीधे दखल नहीं देना चाहिए। आमतौर पर सरकारी कर्मचारियों के तबादले के लिए एक तय प्रक्रिया होती है, जिसमें ‘ट्रांसफर गाइडलाइंस’ के आधार पर संबंधित विभाग का सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) ही अंतिम फैसला लेता है। हाई कोर्ट ने इसी व्यवस्था को बहाल रखने पर जोर दिया है।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “CM के पास बेहतर काम हैं”
जस्टिस डी. के. सिंह और जस्टिस टी. एम. नदफ की डिवीजन बेंच ने एक अपील पर सुनवाई करते हुए कहा, “हमारी राय है कि माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय को ट्रांसफर और पोस्टिंग के अनुरोधों पर सीधे विचार नहीं करना चाहिए। राज्य के सर्वोच्च अधिकारी (CM) के पास सरकारी कर्मचारियों के तबादलों में हस्तक्षेप करने के बजाय करने के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण और बेहतर काम हैं।”
क्या था मामला? (Factual Background)
- दखलअंदाजी का मामला: एक असिस्टेंट मैनेजर (Petitioner) ने विभाग के बजाय सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ की मंजूरी हासिल कर ली थी।
- सिंगल जज का शक: पहले इस मामले की सुनवाई कर रहे सिंगल जज ने संदेह जताया था कि क्या मुख्यमंत्री को पता भी है कि उनके नाम पर क्या आदेश जारी हो रहे हैं? जज ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे ऑफिस में बैठा कोई व्यक्ति ‘मैकेनिकली’ (बिना सोचे-समझे) ऐसे लेटर जारी कर रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और कानूनी विवाद बढ़ रहे हैं।
- सरकार का पक्ष: राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) ने हलफनामा देकर सफाई दी कि CMO से आने वाले नोट्स सिर्फ ‘सिफारिशी’ (Recommendatory) होते हैं, वे अंतिम आदेश नहीं होते।
हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश
- विभाग ही तय करे: कर्मचारियों के तबादले और पोस्टिंग पूरी तरह से संबंधित प्रशासनिक विभागों पर छोड़ देने चाहिए।
- दखल पर रोक: मुख्यमंत्री कार्यालय को सीधे ऐसे अनुरोध स्वीकार नहीं करने चाहिए।
- आदेश की कॉपी: हाई कोर्ट ने इस आदेश की एक कॉपी खुद मुख्यमंत्री के सामने रखने का निर्देश दिया है, ताकि वह अपने कार्यालय को इस संबंध में जरूरी निर्देश दे सकें।

