Accident Compensation: सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनियों की अपीलों को खारिज कर दिया और हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
कोर्ट ने साफ कहा कि नुकसान और लाभ के संतुलन (Balancing loss and gain) के सिद्धांत का इस्तेमाल पीड़ितों के हकों को कम करने के लिए नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि मोटर दुर्घटना (Motor Accident) में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को मिलने वाला ग्रुप इंश्योरेंस (Group Insurance) या अन्य सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स की राशि को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मिलने वाले मुआवजे (Compensation) से घटाया नहीं जा सकता।
पूरा मामला क्या था?
- अदालत दो अलग-अलग अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।
- केस 1: एक्सेंचर (Accenture) के एक टीम मैनेजर की सड़क हादसे में मौत हो गई। ट्रिब्यूनल (MACT) ने मुआवजे की राशि से 35.48 लाख रुपये यह कहकर काट लिए थे कि यह पैसा परिवार को ‘ग्रुप इंश्योरेंस’ के जरिए मिल चुका है।
- केस 2: एक अन्य हादसे में असिस्टेंट मैनेजर की मौत हुई, जहाँ ट्रिब्यूनल ने 10 लाख रुपये की ग्रुप इंश्योरेंस राशि मुआवजे से घटा दी थी।
- हाई कोर्ट ने इन कटौतियों (Deductions) को गलत बताते हुए पूरा मुआवजा देने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ बीमा कंपनी और KSRTC ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट का तर्क: क्यों नहीं होगी कटौती?
- जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने स्पष्ट किया।
- स्वतंत्र अनुबंध (Independent Contract): इंश्योरेंस या पेंशन के फायदे मृतक और कंपनी के बीच एक अलग कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा होते हैं। इनका एक्सीडेंट के मुआवजे से कोई सीधा लेना-देना (Nexus) नहीं है।
- दार्शनिक आधार: कोर्ट ने कहा कि मृतक ने अपने जीवनकाल में जो निवेश या अनुबंध किए, उनका लाभ उसके परिवार को मिलना ही चाहिए। यह लाभ ‘दुर्घटना की वजह से’ नहीं मिला है, बल्कि मृतक की अपनी प्लानिंग का हिस्सा था।
- हितकारी कानून (Beneficial Provision): मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 का मकसद पीड़ित परिवार को ‘सामाजिक न्याय’ (Social Justice) दिलाना है, न कि उनके मिलने वाले लाभों में कटौती करना।
“मृतक के वारिसों को मिलने वाली बीमा राशि, ग्रेच्युटी या पेंशन ‘आर्थिक लाभ’ (Pecuniary Advantage) नहीं हैं जिन्हें मुआवजे से घटाया जा सके।”
सुप्रीम कोर्ट
मुआवजा निर्धारण के मुख्य घटक (Components of Compensation)
आमतौर पर MACT मुआवजा तय करते समय इन बातों का ध्यान रखता है। इनमें आय (Income) के तौर पर मृतक की मासिक सैलरी, आयु (Age Multiplier) में उम्र के हिसाब से तय किया गया मल्टीप्लायर, भविष्य की संभावनाएं (Future Prospects) में करियर में होने वाली संभावित तरक्की व कटौती में केवल व्यक्तिगत खर्चों (Personal Expenses) की कटौती की जाती है।
IN THE SUPREME COURT OF INDIA
CIVIL APPELLATE JURISDICTION
CIVIL APPEAL NO(s). 5490-5491 OF 2025
CIVIL APPEAL NO (s). 5492-5493 OF 2025
Pankaj Mithal J. and Prasanna B. Varale J.
THE MANAGING DIRECTOR, KSRTC VERSUS P. CHANDRAMOULI & ORS.

