JUDGE PROBE: राजस्थान हाई कोर्ट ने जालौर जिले के भीनमाल में तैनात अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) राजेंद्र साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
यह कार्रवाई छह अलग-अलग मामलों में उनके खिलाफ “गंभीर” आरोपों की प्रारंभिक जांच के बाद की गई है। हाई कोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निलंबन एक एहतियाती कदम है ताकि चल रही जांच निष्पक्ष और बिना किसी प्रभाव के पूरी हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट द्वारा एक ‘जिला न्यायाधीश कैडर’ के अधिकारी पर ऐसी त्वरित कार्रवाई करना न्यायिक शुचिता और अनुशासन बनाए रखने का एक कड़ा संदेश है।
निलंबन का आधार और आदेश
- आदेश की तिथि: रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा द्वारा 17 मार्च को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह निर्णय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने लिया है।
- नियम: यह कार्रवाई राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1958 के नियम 13 और 30 अक्टूबर 1971 के ‘फुल कोर्ट’ संकल्प के तहत की गई है।
- मुख्यालय परिवर्तन: निलंबन की अवधि के दौरान, साहू का मुख्यालय भीनमाल से बदलकर राजस्थान हाई कोर्ट, जोधपुर कर दिया गया है। उन्हें तत्काल रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।
वकीलों की शिकायत और आरोप
- न्यायाधीश साहू के खिलाफ स्थानीय बार एसोसिएशन और अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल रखा था।
- दुर्व्यवहार: भीनमाल बार एसोसिएशन के सचिव श्रवण ढाका के अनुसार, अधिवक्ताओं के साथ जज के व्यवहार को लेकर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
- अनैतिक कार्य: शिकायत में “गंभीर प्रकृति के गैर-पेशेवर और अनैतिक कार्यों” (Unethical Practices) के आरोप लगाए गए हैं।
- गंभीर मामले: कुल छह अलग-अलग केसों में उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद हाई कोर्ट ने प्रारंभिक जांच बैठाई थी।
अगला कदम और सुविधाएं
- निर्वाह भत्ता: निलंबन के दौरान, नियमानुसार उन्हें निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) मिलता रहेगा।
- जांच की प्रक्रिया: अब एक विस्तृत विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू होगी। इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही उनकी सेवा बहाली या आगे की दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।

