Minorities Panel: दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) में अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पदों को भरने में हो रही देरी पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
कोर्ट इस बात से नाराज है कि बार-बार आदेश के बावजूद सरकार ने नियुक्तियों के लिए कोई “टाइमलाइन” (समय सीमा) पेश नहीं की है। नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज एक्ट के तहत, इस आयोग का काम भारत के अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन) के अधिकारों की रक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी को दो हफ्ते के भीतर इस लापरवाही पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां: “अफसर को हमारे चैंबर में बुलाएं”
- चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने केंद्र के हलफनामे (Affidavit) पर असंतोष जताया।
- कोर्ट का अपमान: “देखिए कोर्ट के आदेश को कितनी कैजुअली लिया गया है। ऐसा लगता है जैसे कोर्ट को गुमराह किया जा रहा है (Taken for a ride)।”
- अस्पष्ट जवाब: सरकार ने केवल इतना कहा कि प्रक्रिया चल रही है और बायोडाटा की जांच हो रही है। इस पर कोर्ट ने पूछा, “हमें उस अधिकारी को बुलाकर पूछना होगा कि ‘टाइमलाइन’ शब्द का मतलब क्या होता है।”
- समन की चेतावनी: बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा से कहा कि बेहतर होगा कि संबंधित अधिकारी को जवाब देने के लिए चैंबर में बुलाया जाए।
यह है पूरा विवाद? (The Issue)
- यह मामला मुजाहिद नफीस द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में कई आरोप लगाए गए हैं।
- पूरी तरह ठप: पिछले साल अप्रैल से अल्पसंख्यक आयोग बिना किसी अध्यक्ष या सदस्य के चल रहा है।
- संवैधानिक और वैधानिक चूक: आयोग एक वैधानिक संस्था (Statutory Body) है, लेकिन सरकार द्वारा नियुक्तियां न करने से यह पूरी तरह ‘Defunct’ (निष्क्रिय) हो गई है।
- मांग: याचिकाकर्ता ने मांग की है कि पारदर्शी तरीके से अगले 4 हफ्तों के भीतर सभी 7 पदों (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 5 सदस्य) पर नियुक्तियां पूरी की जाएं।

