EC Appointments: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने खुद को अलग (Recuse) कर लिया है।
CJI ने क्यों लिया यह फैसला?
- सुनवाई की शुरुआत में ही CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में उनके शामिल होने से ‘हितों के टकराव’ का सवाल उठ सकता है।
- वजह: याचिका में उस कानून को चुनौती दी गई है जिसने चुनाव आयुक्तों को चुनने वाली कमेटी से CJI को बाहर कर दिया है।
- CJI का तर्क: उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई ऐसी बेंच को करनी चाहिए जिसमें कोई भी ऐसा जज न हो जो भविष्य में मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने की कतार में हो, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात (Bias) का अंदेशा न रहे।
- एडवोकेट प्रशांत भूषण ने भी इस विचार का समर्थन किया, जिसके बाद CJI ने मामले को 7 अप्रैल के लिए एक नई बेंच के पास भेजने का निर्देश दिया।
विवाद की जड़: क्या है 2023 का नया कानून?
मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने आदेश दिया था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक ऐसी कमेटी करेगी जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI शामिल होंगे। लेकिन संसद ने दिसंबर 2023 में एक नया कानून पास कर चयन समिति का ढांचा बदल दिया।
चयन समिति (Selection Committee) में बदलाव
पुरानी समिति (SC के आदेशानुसार) नई समिति (2023 के कानून अनुसार)
- प्रधानमंत्री 1. प्रधानमंत्री
- विपक्ष के नेता 2. विपक्ष के नेता
- भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) 3. प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री
याचिकाकर्ताओं का तर्क
कांग्रेस नेता जया ठाकुर और ADR (Association for Democratic Reforms) जैसी संस्थाओं ने इस कानून को चुनौती दी है। उनका कहना है कि कमेटी से CJI को हटाकर एक केंद्रीय मंत्री को शामिल करना चुनाव आयोग की स्वतंत्रता (Independence) को कमज़ोर करता है। इससे नियुक्ति प्रक्रिया में पूरी तरह सरकार का वर्चस्व (Dominance) हो जाएगा।
केंद्र सरकार का पक्ष
सरकार ने हलफनामे में दलील दी है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता केवल किसी न्यायिक सदस्य (CJI) की उपस्थिति पर निर्भर नहीं करती।कानून बनाना संसद का अधिकार है और यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।

