The Failed Deal: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के एक आईटी उद्यमी (IT Entrepreneur) को दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दी।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने उद्यमी वेणु गोपालकृष्णन को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया था। कोर्ट ने माना कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल “प्रतिशोध” के लिए किया गया है। एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अदालत ने पाया कि इस मामले में आपराधिक शिकायत तब दर्ज की गई जब दोनों पक्षों के बीच ₹30 करोड़ के वित्तीय समझौते (Settlement) की बात विफल हो गई।
₹30 करोड़ का ‘सेटलमेंट’ प्रस्ताव (The Failed Deal)
- कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों के आधार पर कुछ चौंकाने वाली बातें नोट कीं।
- मीटिंग: 24 जुलाई, 2025 को आरोपी, शिकायतकर्ता महिला और उसके पति के बीच एक मीटिंग हुई थी।
- सौदा: इस मीटिंग में आरोपों को खत्म करने के लिए ₹30 करोड़ की मांग की गई थी, जिसे किस्तों में दिया जाना था।
- अदालत की टिप्पणी: बेंच ने कहा, “शिकायतकर्ता और उनके पति ₹30 करोड़ लेकर मामले को शांत करने के लिए तैयार थे। यदि यह वित्तीय समझौता सफल हो जाता, तो शायद कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू ही नहीं होती।”
घटनाक्रम: काउंटर ब्लास्ट की थ्योरी पर आधारित
- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के ‘टाइमलाइन’ पर विशेष ध्यान दिया, जिससे मामला संदिग्ध लगा।
- जबरन वसूली की शिकायत: आरोपी (उद्यमी) को जब लगा कि उससे पैसे ऐंठने की कोशिश की जा रही है, तो उसने 28 जुलाई, 2025 को महिला और उसके पति के खिलाफ जबरन वसूली की शिकायत दर्ज कराई।
- गिरफ्तारी: इस शिकायत पर महिला और उसके पति को गिरफ्तार किया गया और बाद में वे जमानत पर छूटे।
- रेप की FIR: अपने ऊपर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, महिला ने उद्यमी के खिलाफ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की FIR दर्ज कराई।
- नतीजा: कोर्ट ने इसे पहले की गई कार्रवाई के जवाब में किया गया ‘काउंटर ब्लास्ट’ (Counter Blast) करार दिया।
जमानत की शर्तें और कानूनी सुरक्षा
- सुप्रीम कोर्ट ने उद्यमी को सुरक्षा देते हुए कुछ शर्तें लागू की हैं।
- कैश सिक्योरिटी: गिरफ्तारी की स्थिति में ₹1 लाख की नकद सुरक्षा और दो जमानती (Sureties) पेश करने पर रिहाई।
- जांच में सहयोग: आरोपी को पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा।
- साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं: गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने पर जमानत रद्द कर दी जाएगी।
- ट्रायल पर प्रभाव नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां केवल ‘जमानत’ के लिए हैं और इनका ट्रायल के मुख्य मेरिट (दोष या निर्दोषता) पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| आरोपी | वेणु गोपालकृष्णन (केरल स्थित IT उद्यमी)। |
| धाराएं | भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (रेप), 75 (यौन उत्पीड़न) और IT एक्ट की धारा 67A। |
| मुख्य आधार | ₹30 करोड़ की मांग और FIR दर्ज करने में संदिग्ध देरी। |
| कोर्ट का रुख | आपराधिक कानून का उपयोग व्यक्तिगत रंजिश या पैसे ऐंठने के लिए नहीं होना चाहिए। |
अदालतों की बढ़ती सतर्कता
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन मामलों के लिए एक नजीर है जहाँ गंभीर आरोपों का इस्तेमाल ‘हथियार’ के रूप में किया जाता है। हालांकि अदालतें महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील हैं, लेकिन इस केस ने दिखाया कि जहाँ वित्तीय लेनदेन और ‘ब्लैकमेलिंग’ की बू आती है, वहाँ न्यायपालिका पूरी गंभीरता से तथ्यों की जांच करती है।
SUPREME COURT OF INDIA
RECORD OF PROCEEDINGS
Hon’ble Mrs. Justice B.V.Nagarathna, Hon’ble Mr. Justice Ujjal Bhuyan
PETITION(S) FOR SPECIAL LEAVE TO APPEAL (CRL.) NO(S).15379/2025
ARISING OUT OF IMPUGNED FINAL JUDGMENT AND ORDER DATED 11-09-2025
IN BA NO. 9589/2025 PASSED BY THE HIGH COURT OF KERALA AT ERNAKULAM
IA NO. 245213/2025 – EXEMPTION FROM FILING O.T
VENU GOPALAKRISHNAN VERSUS THE STATE OF KERALA & ANR.

